फोलिक एसिड का सेवन न करने वाली महिलाएं गर्भ में पल रहे अपने बच्चे को अनजाने में हड्डी की दुर्लभ बीमारी (ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफैक्टा यानी ब्रिटल बोन डिजीज) की तरफ धकेल रही हैं। इसमें बच्चों की हड्डियां तेजी से फ्रैक्चर होती हैं। महिलाएं गर्भधारण के तीन महीने पहले से फोलिक एसिड का सेवन कर बच्चों को इसकी चपेट में आने से बचा सकती हैं। पीजीआई एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की विशेषज्ञ प्रो. इनुषा पाणिग्रही ने ब्रिटल बोन डिजीज से ग्रस्त बच्चों पर किए शोध में यह खुलासा किया है।
प्रो. इनुषा पाणिग्रही ने बताया कि ऐसे बच्चों को जन्म के बाद हड्डियां मजबूत करने के लिए दवा दी जाती है। यह दवा हर तीन महीने पर देनी होती है। इसका कुछ समय बाद परिणाम जांच कर समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है। आमतौर पर ऐसे बच्चों का सर्वाइवल बहुत कम होता है। प्रो. इनुषा का कहना है कि ऐसे बच्चों में यह मर्ज न्यूरल ट्यूब में डिफेक्ट के कारण होने का खतरा रहता है। इस गड़बड़ी को गर्भधारण करने से पहले फोलिक एसिड लेकर रोका जा सकता है। फोलिक एसिड की तीन महीने की प्री-खुराक से बच्चे में इस मर्ज के खतरे को 75 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। वे प्रेग्नेंसी प्लान करने वाली महिलाओं को तीन महीने की खुराक पूरी करने की सलाह दे रही हैं।
45 बच्चों को किया शोध में शामिल
प्रो. इनुषा ने बताया कि पीजीआई में इस मर्ज से ग्रस्त 40 बच्चों पर किए गए शोध में इसके कारणों की तलाश की गई। इसमें पाया गया कि कुछ एक में माता-पिता का जीन इसका कारण पाया गया, वहीं कुछ बच्चे ऐसे भी मिले, जिनके माता-पिता के जीन में कोई गड़बड़ी नहीं थी। प्रेग्नेंसी हिस्ट्री से पता चला कि उनमें अन्य कारणों में फोलिक एसिड का रोल अहम है इसलिए इस दुर्लभ बीमारी के कारणों में फोलिक एसिड की कमी एक मुख्य कारण के रूप में सामने आई। इस शोध को जनरल ऑफ पीडियाट्रिक जेनेटिक्स में प्रकाशित किया गया है।
आप भी जान लें ये मर्ज
ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफैक्टा एक अनुवांशिक रोग है। इसमें कोलाजोन 1 की कमी से हड्डियों में मजबूती नहीं आती है और हड्डियां हल्की सी चोट या धक्के से टूट जाती हैं। यह हर 20,000 लोगों में लगभग एक को प्रभावित करता है।
ऐसे करें बचाव
- एक स्वस्थ बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) प्राप्त करना और बनाए रखना
- कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर पौष्टिक आहार लेना
- उतना ही व्यायाम करना जितना उनके डॉक्टर सुझाते हैं
- शराब और धूम्रपान न करें
लक्षणों पर करें गौर
- हड्डी में विकृति और दर्द।
- आसानी से चोट लगना ।
- सांस लेने में दिक्क्त।
- जोड़ या मांसपेशियों की कमजोरी।
- घुमावदार रीढ़।
- छोटा कद।