पीजीआई में इस समय समर वेकेशन चल रहा है और आधे से ज्यादा कंसलटेंट छुट्टी पर हैं। ओपीडी के समय किसी डिपार्टमेंट में एक कंसलटेंट तो किसी डिपार्टमेंट में एक भी नहीं होते हैं। सारी ओपीडी सीनियर रेजिडेंस के हवाले होती है। हद तो तब हो जाती है जब जिस डाक्टर की ड्यूटी होती है, वह भी छुट्टी पर होते हैं।
ऐसा एक बार नहीं, कई बार देखने को मिला है। कुल मिलाकर इस समय इलाज कराने आने वाले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, पीजीआई में 16 मई से 15 जुलाई तक समर वेकेशन रहती है। ये छुट्टियां हर साल आती हैं, लेकिन सभी डाक्टर एक साथ छुट्टी पर नहीं होते हैं।
आधे डाक्टर 16 मई से लेकर 14 जून तक तो आधे डाक्टर 16 जून से 15 जुलाई तक छुट्टी पर होते हैं। ये छुट्टियां सिर्फ डाक्टरों को ही दी जाती हैं, कर्मचारियों और टेक्नीशियनों को नहीं। इसलिए कई बार कई बार विवाद भी उठ चुका है।
कुछ डाक्टर दो महीने की छुट्टी पर
पीजीआई के कुछ ऐसे डाक्टर भी हैं, जो पूरे दो महीने की छुट्टी पर रहते हैं। इसमें कार्डियोलाजी, कम्युनिटी मेेेडिसिन, गेस्ट्रोएंट्रोलाजी, हेप्टोलाजी, न्यूरोलाजी, गायनी, आर्थोपेडिक्स, आप्थलमोलाजी, पीडियाट्रिक्स, रेडियोडाइग्नोसिस, यूरोलाजी डिपार्टमेंट के सीनियर डाक्टर शामिल हैं।
इन डाक्टरों के अलावा जो बचे हैं, वे भी बीच-बीच में छुट्टी मार लेते हैं। पीजीआई के डाक्टर सर्दियों में भी छुट्टी में रहते हैं। उस समय उन्हें 15 दिन की छुट्टी मिलती है।
समय पर नहीं आते डॉक्टर
एक तो छुट्टी है तो ऊपर से जिन डॉक्टरों की ड्यूटी है, वे भी समय पर ओपीडी में नहीं पहुंचते हैं। इससे मरीजों की परेशानी दोगुनी बढ़ जाती है। अभी डाक्टर साढ़े दस से 11 बजे तक पहुंच रहे हैं। हालांकि, सीनियर रेजिडेंट समय पर पहुंच जाते हैं और मरीजों का समय पर चेकअप शुरू हो जाता है, लेकिन कंसलटेंट से किसी मरीज को बातचीत करनी हो तो वे नहीं मिलते।
ऐसे परेशान हो रहे मरीज
केस-1
आठ जून को एडवांस पीडियाट्रिक्स सेंटर में पंजाब निवासी कुछ लोग अपने बच्चे का चेकअप कराने आए। बच्चे के दिल में छेद था। उसे कार्डियोवस्कुलर एंड थोरेरिक सर्जरी डिपार्टमेंट भेज दिया गया। सीनियर रेजिडेंट ने कहा कि आज कोई कंसलटेंट नहीं है। बुधवार को आना। बुधवार को डिपार्टमेंट के एक सीनियर प्रोफेसर की ड्यूटी थी, लेकिन जब बच्चे को लेकर पहुंचे तो पता चला प्रोफेसर साहब छुट्टी पर हैं। दूसरा कंसलटेंट है ही नहीं। दो हफ्ते हो गए, लेकिन अब तक उन्हें कोई कंसलटेंट नहीं मिला।
केस-2
एक घटना में घायल राजेश को जीएमसीएच-32 से एक हफ्ते पहले रेफर किया गया था। वह एक हफ्ते से पीजीआई में है। उसे मल्टीप्ल फ्रैक्चर है। आर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के एक डाक्टर को उसका आपरेशन करना था। डाक्टरों ने पहले कहा कि उसे बेड शोर है। ठीक होने के बाद ही आपरेशन हो पाएगा। बेडशोर ठीक हो गया, लेकिन सोमवार तक आपरेशन नहीं हो सका। आपरेशन का सारा सामान भी मंगवा लिया गया था। अब डाक्टर का कहना है कि वह इस समय अकेले हैं और मरीजों का बोझ ज्यादा है।