प्रो. जगतराम कहते हैं कि यह सर्वे उन बच्चों के प्रतिशत का अनुमान लगाने में मदद करेगा जिनमें पहले से ही एंटीबॉडी मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के बीच टीकाकरण यदि निकट भविष्य में शुरू किया गया तो इस डाटा के जरिए जरूरी व्यवस्था की जा सकेगी। बता दें कि पीजीआई के डीन (अकादमिक) प्रो. जीडी पुरी की देखरेख में यह सर्वे किया जा रहा है। इसमें वायरोलॉजी और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की टीम भी काम कर रही है।
सर्वे के लिए शहर को तीन जोन में बांटा गया
पहला: सेक्टर-3, 6, 22, 24, 29, 36, 46, 47, 48, 56 से एक समान प्रतिनिधित्व के नमूने लिए जाएंगे।
दूसरा: गांव खुड्डा जस्सू, धनास, मलोया, मौलीजागरां, माखन माजरा, रायपुर कलां, बुड़ैल, (सेक्टर-45), अटावा (सेक्टर 42), कजहेड़ी (सेक्टर- 52)।
तीसरा: हल्लोमाजरा, कालोनी नंबर चार, औद्योगिक क्षेत्र, भास्कर कालोनी, संजय कालोनी, इंदिरा कालोनी, बापूधाम, मौलीजागरां, डड्डू माजरा, कालोनी नंबर पांच, एसबीएस कालोनी, मनीमाजरा।
सीरो सर्वे का महत्व
सीरो सर्वे दो चीजें दर्शाता है। पहली कि कितनी फीसदी जनसंख्या वायरस की चपेट में आई है। दूसरी, कौन से ग्रुप में वायरस के लक्षण ज्यादा पाए गए हैं। यही वजह इस सर्वे को बाकी सर्वे से अलग बनाता है।