पीजीआई पोस्टमार्टम हाउस में बच्चे का एक दिन में दो बार काटा गया पर्चा।
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ऐसे में डॉक्टरों ने गर्भपात की सलाह दी लेकिन गर्भ 20 हफ्ते से ऊपर का हो गया था। ऐसे में दंपति को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हाईकोर्ट ने पीजीआई को पैनल गठित कर मामले को देखने को कहा। पीजीआई के पैनल ने भी गर्भपात की सलाह दी। पीजीआई की सलाह मानते हुए हाईकोर्ट ने गर्भपात के आदेश जारी कर किए।
आरोप: गाइनी डिपार्टमेंट ने कहा- बच्चे के मरने का इंतजार करो
20 दिसंबर को संतोष ने अपनी पत्नी को उसे पीजीआई में दाखिल कराया। जहां 26 दिसंबर को पीजीआई की टीम ने उसका गर्भपात कर 24 हफ्ते के जिंदा नवजात को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जब पोस्टमार्टम हाउस के कर्मियों ने देखा तो नवजात की सांसें चल रही थी। कर्मियों का आरोप है कि जब उन्होंने गाइनी डिपार्टमेंट में बात की तो कहा गया कि नवजात के मरने का इंतजार किया जाए।
बाद में विरोध करने पर उसे पोस्टमार्टम हाउस से वापस ले जाया गया। इसके बाद करीब 12 घंटे तक नवजात जिंदा रहा और फिर दम तोड़ दिया। उसके बाद दोबारा से पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। हालांकि इस बारे में जब नवजात के परिजनों से बात की गई तो उनका कहना था कि उन्हें किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। पीजीआई कर्मचारी यूनियन का कहना है कि इस चूक से पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी सदमे में हैं। यूनियन की मांग की है कि जिन्होंने लापरवाही की है, उन्हें सस्पेंड किया जाए।
इस घटना की सूचना मुझे है लेकिन इससे संबंधित बयान प्रवक्ता देंगे। - प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई
मामला बेहद गंभीर है। इसकी जांच शुरू कर दी गई है। लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई करेंगे। - प्रो. अशोक कुमार, प्रवक्ता पीजीआई
पीजीआई जैसे संस्थान में इस तरह की चूक काफी गंभीर है। इससे कर्मचारी सदमे में हैं। लापरवाही करने पर कार्रवाई की जाए। - अश्विनी कुमार मुंजाल, अध्यक्ष, पीजीआई कर्मचारी यूनियन