लॉकडाउन की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों के काम-धंधे चौपट हुए हैं। कोरोन वायरस ने चंडीगढ़ प्रशासन को भी आर्थिक तौर पर बड़ा झटका दिया है। अनलॉक की प्रक्रिया के शुरू होने के बाद भी शहर की अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई है। पिछले साल के मुकाबले अगस्त महीने में भी सकल (ग्रोस) जीएसटी कलेक्शन में 13 फीसदी की कमी आई है।
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी), एक्साइज और वैल्यू एडिड टैक्स (वैट) चंडीगढ़ प्रशासन के खजाने को भरने में अहम भूमिका अदा करते हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से बड़ा असर भी इन्हीं पर पड़ा है। सिर्फ जीएसटी के कलेक्शन में पिछले साल अगस्त के मुकाबले 13 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अगस्त 2019 में जीएसटी का कलेक्शन करीब 160 करोड़ रुपये था जबकि इस बार 139 करोड़ ही आया है।
अप्रैल महीने में प्रशासन को सिर्फ 14 करोड़, मई महीने में 42 करोड़, जून में 73 करोड़ और जुलाई महीने में 109 करोड़ का जीएसटी कलेक्शन हुआ था। अप्रैल और मई महीने में सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां बंद रहीं, जिसकी वजह से टैक्स की कलेक्शन में भारी कमी आई। अप्रैल और मई महीने में लगे संपूर्ण लॉकडाउन की वजह से चंडीगढ़ प्रशासन को टैक्स कलेक्शन में 342 करोड़ का घाटा हुआ। गौरतलब है कि जीएसटी पेट्रोल और शराब को छोड़कर अन्य पर वसूला जाता है।
अप्रैल, मई, जून और जुलाई के मुकाबले स्थिति बेहतर
जीएसटी कलेक्शन में आई कमी को लेकर न छापने की शर्त पर प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि अप्रैल, मई, जून और जुलाई के मुकाबले स्थिति बेहतर हुई है। अप्रैल और मई महीने में सबसे ज्यादा करीब 342 करोड़ का घाटा हुआ था, क्योंकि इस दौरान सभी काम ठप्प थे। हालांकि अभी भी अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है, इसलिए टैक्स कलेक्शन में कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में स्थिति के सामान्य होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि जीएसटी कलेक्शन में पंजाब में 9 प्रतिशत तो हरियाणा में भी दो प्रतिशत की कमी आई है। यह आंकड़े पिछले वर्ष अगस्त महीने और इस वर्ष अगस्त महीने के मुकाबले हैं।