पंजाब में टोल प्लाजाओं पर किसानों द्वारा बीते पांच महीनों से धरने जारी रखते हुए टोल वसूली बंद कर दिए जाने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को अब तक करीब 500 करोड़ का नुकसान हो चुका है। यह खुलासा एनएचएआई की ओर से पंजाब की मुख्य सचिव को भेजे पत्र में हुआ है।
बता दें कि पंजाब से होकर गुजरते राष्ट्रीय राजमार्गों पर एनएचएआई के 25 टोल प्लाजा हैं, लेकिन केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बीते साल सितंबर-अक्तूबर से पंजाब में सभी टोल प्लाजा पर किसानों ने धरना शुरू कर दिया और वहां टोल टैक्स की वसूली बंद कर दी, जो अब भी बंद है। एनएचएआई ने पत्र में लिखा है कि 1 अक्तूबर, 2020 से वाहनों को बिना टोल टैक्स दिए आने-जाने दिया जा रहा है।
आंदोलनकारी किसानों के इस कदम से राज्य के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर एनएचएआई को टोल टैक्स के रूप में होने वाली आमदनी रुक गई है और एनएचएआई को 1 अक्तूबर, 2020 से मार्च 2021 तक लगभग 500 करोड़ का नुकसान हो चुका है।
एनएचएआई का कहना है कि टोल के जरिये होने वाली आमदनी रुकने के कारण पंजाब में हाईवे की मरम्मत का काम भी प्रभावित हुआ है। इसके अलावा राज्य में प्रस्तावित विभिन्न राजमार्ग परियोजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित हुआ है। पैसे की आमद रुकने से नए प्रोजेक्टों पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है और मौजूदा नेशनल हाईवे की मरम्मत भी नहीं हो रही है।
पत्र कहा गया है कि केंद्रीय सड़क मार्ग एवं राजमार्ग मंत्रालय ने यह मसला पंजाब सरकार के सामने पहले भी उठाया था, लेकिन कोई हल नहीं निकाला। एनएचएआई ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि आंदोलनकारी किसानों से समझाकर मसले का हल निकाला जाए, ताकि राज्य में टोल प्लाजा पर टैक्स वसूली का काम शुरू हो सके।
गौरतलब है कि आंदोलन के तहत पंजाब में किसानों ने न सिर्फ टोल प्लाजा, बल्कि रिलायंस के पेट्रोल पंपों पर भी धरना लगा रखा है। किसान तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग पर अड़े हैं और केंद्र सरकार अब तक किसानों की कोई मांग मानने को तैयार नहीं हुई है।