उन्हें कई बार मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उन्हें व्हीलचेयर, स्पेशल डाइट व अन्य सुविधाएं भी प्रदान नहीं की गई। वीजा न होने के कारण डेनमार्क में लोकल बॉर्डर पुलिस ने उन्हें डिटेंशन में रखा। उनके साथ क्रिमिनल की तरह बर्ताव किया गया। उनके पति ने एंबेसडर के साथ संपर्क किया और उनकी सहायता से उन्हें रिलीज किया गया और वह उसके बाद ही फ्लाइट लेकर किसी तरह नई दिल्ली पहुंचीं। दूसरे तीनों पक्षों ने आयोग में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती।
यह हैं आयोग के आदेश
आयोग ने अपने आदेशों में कहा कि लुफ्थांसा एयरलाइंस सैन फ्रांसिस्को एयरपोर्ट पर फ्लाइट कैंसिल होने के चलते शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये अदा करे। बिना सहमति के यात्रा के रूट को बदलने के लिए लुफ्थांसा एयरलाइंस व ब्रिटिश एयरवेज दोनों शिकायतकर्ता को 5 लाख रुपये अदा करें। लुफ्थांसा एयरलाइंस व ब्रिटिश एयरवेज को डेनमार्क के लिए ट्रांजिट वीजा का बंदोबस्त न करने के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा देना होगा।
बिना किसी गलती के शिकायतकर्ता को लोकल पुलिस द्वारा डिटेंशन में रखने के चलते लुफ्थांसा एयरलाइंस व ब्रिटिश एयरवेज दोनों को कुल 25 लाख रुपये मुआवजा देना होगा। दोनों एयरलाइंस को व्हील चेयर, डायबिटिक मील व अन्य सहायता न प्रदान करने के चलते शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये मुआवजा देना होगा।
शिकायतकर्ता की यात्रा में 52 घंटे देरी करने के चलते दोनों एयरलाइंस को समान शेयर में 5 लाख रुपये मुआवजा देना होगा। सूर्या ट्रेवल्स एंड एसोसिएट्स को अपनी जिम्मेदारी से भागने के लिए 5 लाख रुपये मुआवजा शिकायतकर्ता को देना होगा। इसके अलावा तीनों पार्टियों को 50 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा। आदेश की प्रति मिलने पर 45 दिनों के अंदर इन आदेशों का पालन करना होगा।