टर्सरी वाटर पाइप लाइन डालने की योजना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण की योजना पर 50 करोड़ की लागत आएगी। इसमें मलोया, डड्डूमाजरा कॉलोनी व गांव, धनास, बॉटेनिकल गार्डन, सारंगपुर, सेक्टर 25, अमन-चमन कॉलोनी, मिल्क कॉलोनी को शामिल गया है। वहीं, वर्ष 2008 तक सेक्टर 48 से 63 तक ठीक ढंग से नहीं बसे थे। अब वहां भी स्थिति ठीक है, इसलिए इन क्षेत्रों को भी इसमें लिया गया है। अब तक टर्सरी वाटर के लिए डिग्गियां स्थित सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से लाया जाता था।
अब इन क्षेत्रों में मलोया के नए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से 5 मिलियन गैलन ट्रीट किया हुआ पानी लाया जाएगा, जिसका बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 5 से भी कम होगी, जबकि डिग्गियां वाले का बीओडी 20 से कम है। इस पानी को स्टोर करने के लिए मलोया में 1 एमजी का टैंक व पंप हाउस बनाया जाएगा। वहीं, 3 बीआरडी के एसटीपी से ट्रीट करके आने वाले पानी को स्टोर करने के लिए भी 1 एमजी का टैंक व पम्प हाउस बनाया जाएगा। इसका भी बीओडी 5 से कम है।
वहीं, दूसरे चरण की योजना 10 करोड़ की होगी। इसमें रायपुरकलां एसटीपी से मनीमाजरा, विकास नगर, मौलीजागरां, मॉडल हाउसिंग कांप्लेक्स, इंदिरा कॉलोनी से आईटी पार्क तक पाइप लाइन डालकर टर्सरी वाटर भेजा जाएगा।
चंडीगढ़ में वर्ष 1992 में टर्सरी वाटर की पाइप लाइन डाली गई थी। तब डिग्गियां स्थित एसटीपी से राजेंद्र पार्क तक पाइप लाइन डाली गई थी। वर्ष 2008 में सेक्टर 47 तक जवाहर लाल नेहरू अर्बन एंड रिन्युअल मिशन योजना के तहत पाइप लाइन डाली गई। साथ ही 1 एमजी की क्षमता वाले सेक्टर 48 व 28 में एक और 29 में 2 टैंक बनाए गए। डिग्गियां से यहां पानी आता था और पंपिंग करके सेक्टर 1 से लेकर 47 तक भेजा जाता था।
लगातार नीचे जा रहा भूमिगत जल, मंत्रालय दे चुका है चेतावनी
शहर का भूमिगत जल लगातार नीचे जा रहा है। इसके लिए जल मंत्री चंडीगढ़ को चेतावनी भी दे चुके हैं। लगातार गिरते जलस्तर वाले शहरों की सूची में चंडीगढ़ भी शामिल है। इसके लिए निगम व प्रशासन ने गांवों के तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई थी, लेकिन वह अधर में लटक गई। इसके बाद ट्यूबवेल को बंद करने की योजना बनाई थी। शहर में कजौली वाटर वर्क्स से अतिरिक्त 29 एमजीडी पानी भी आ गया, लेकिन ट्यूबवेल की गिनती में कोई खास असर नहीं पड़ा।
योजना एक नजर में
60 हजार एकड़ : कुल क्षेत्र
35 सौ एकड़ : पहले फेज का क्षेत्र
25 सौ एकड़ : दूसरे फेज का क्षेत्र
50 रुपये : प्रति घर के हिसाब से लिया जाएगा शुल्क
60 करोड़ : योजना की लागत
06 माह में शुरू होगा काम
02 एमजी बचेगा पीने का पानी
1.5 एमजी बचेगा भूमिगत जल
इस योजना के माध्यम से भूमिगत जल को बचाना हमारा उद्देश्य है। साथ ही उपयोग किए गए पानी को ट्रीट करके ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जा सकेगा। शहर के एसटीपी अपग्रेड हो चुके हैं, जिसका बीओडी 5 से कम है। पानी की गुणवत्ता भी इससे बेहतर हुई है। -केके यादव, निगम आयुक्त, चंडीगढ़