चंडीगढ़ में ठोस कचरे को निस्तारित नहीं करने पर नगर निगम ने मंगलवार को शहर की चार सोसाइटियों के सामने लाल रंग का बोर्ड लगा दिया। वहीं, दूसरी तरफ सेक्टर-22 में नगर निगम के खुद के बोर्ड के सामने कचरे का ढेर लगा था। यह कचरा किसी व्यक्ति ने नहीं बल्कि निगम की ओर से इकट्ठा करके डाला गया है। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि निगम उनके ऊपर तो सख्ती कर रहा है, लेकिन अपनी लापरवाही पर नगर निगम कौन सा बोर्ड लगाएगा।
स्वच्छ सर्वेक्षण में पिछड़ने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल के साथ बैठक की थी। बैठक में धर्मपाल ने आदेश दिया था कि जो सोसायटियां अपने ठोस कचरे का मानकों के मुताबिक निस्तारण नहीं करतीं, उन्हें सात दिन का नोटिस जारी किया जाए। उसके बाद उनके मुख्य द्वार के सामने लाल रंग का एक बोर्ड लगा दिया जाए।
बीते मंगलवार को निगम ने सेक्टर-49 की पुष्पक सोसायटी, सेक्टर-50 की प्रोग्रेसिव सोसायटी, बीएसएनएल सोसायटी और सेक्टर-48 की केंद्रीय विहार सोसायटी को नोटिस जारी किए थे। मंगलवार को सात दिन पूरे होने पर निगम ने इन चारों सोसायटी के मुख्य द्वार पर लाल रंग का बोर्ड लगा दिया।
हम भी अपनी मांगों का लगाएंगे बोर्ड : दविंदर गुप्ता
नगर निगम की तरफ से शहर की चार प्रमुख सोसायटियों के बाहर आदेश नहीं मानने का बोर्ड लगाने पर इन सोसायटी में रहने वाले लोग तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। चंडीगढ़ हाउसफेड के पूर्व अध्यक्ष दविंदर कुमार गुप्ता ने कहा है कि नगर निगम ने कोऑपरेटिव सोसायटीज को बदनाम करने के लिए ये बोर्ड लगाए हैं। पूरा चंडीगढ़ कूड़े से भरा है, फिर सोसायटियों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। जिन अधिकारियों की वजह से शहर गंदा हो रहा है, बोर्ड पर उनका नाम भी लिखना चाहिए। अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर मनमाना आदेश जारी कर रहे हैं। गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में सभी कोऑपरेटिव सोसायटियों की प्रबंधन कमेटी अपनी मांगों को इसी तरह बोर्ड पर लगा कर प्रदर्शित करेगी, ताकि नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों की नींद खुल सके।