निगम के खर्चे भी कम नहीं
निगम के पास राजस्व कम है, खर्चे ज्यादा हैं। निगम को 420 करोड़ रुपये सैलरी के, 50 करोड़ रुपये पेंशन के जबकि 120 करोड़ रुपये बिजली बिल अनिवार्य रूप से देने ही हैं। इसके अलावा गाड़ियों पर भी निगम का 100 करोड़ रुपये खर्च होता है। ऐसे में निगम के पास विकास कार्यों के लिए न के बराबर फंड बचता है। हालांकि प्रशासक के सलाहकार ने निगम को आरएलए देने के साथ सामुदायिक केंद्र बनाने यूनिपोल के संख्या बढ़ाने, पेट्रोल पंप के लिए साइट देने का वादा किया है ताकि निगम का राजस्व बढ़ सके।
75 करोड़ भी जल्द निगम के पास पहुंचेंगे
मेयर रविकांत शर्मा ने बताया कि प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने 15 जनवरी को 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ पत्र दे दिया था। इसके अलावा निगम को इस वर्ष अतिरिक्त 75 करोड़ रुपये देने के लिए वित्त सचिव को बोला है। यह रुपया भी जल्द निगम के खाते में आ जाएगा। इस तरह इस वर्ष निगम के पास कुल 500 करोड़ का फंड आ जाएगा।
इन प्रमुख कार्यों पर रहेगी नजर
- 13 गांवों में होंगे विकास कार्य
- मौलीजागरां कॉलोनी व बुड़ैल में पाइप लाइन बदलने का काम
- सेक्टर 22, 23 और 21 में पानी पहुंचाने के लिए सेक्टर 37 के वाटर वर्क्स से पानी की लाइन बदलने का काम
- स्वच्छता अभियान में बेहतर रैंकिंग दिलाने के लिए 23 करोड़ से शहर के सभी सार्वजनिक शौचालयों का मरम्मत कराना
- सीवर के सभी ढक्कनों को बदलना
- सामुदायिक केंद्रों की मरम्मत का काम
इस बार हमारा राजस्व भी बढ़ जाएगा और प्रशासन की ओर ग्रांट इन एड का फंड भी ज्यादा आएगा। इसके अलावा आरएलए निगम में शामिल होने से 300 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व आ जाएगा। अब निगम के सामने वित्तीय समस्याएं नहीं रहेंगी। -रविकांत शर्मा, मेयर