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चंडीगढ़ नगर निगम : बबला और चावला भिड़े, गाली-गलौच

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सेक्टर 17 स्थित नगर निगम कार्यालय में शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे पूर्व कांग्रेस पार्षद दविंदर स - फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद नगर निगम कार्यालय में शनिवार को हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देवेंद्र सिंह बबला और प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला आपस में भिड़ गए। नगर निगम के दर्शक दीर्घा में गाली-गलौज हुई और बाहर देख लेने की धमकी दी गई। दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से हुए इस झगड़े से कांग्रेस का अंतर्कलह सामने आ गया है। कुछ दिनों में मेयर चुनाव होने हैं, अगर यह विवाद नहीं थमा तो मेयर चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है।
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सेक्टर-17 स्थित नगर निगम कार्यालय में शनिवार को डीसी विनय प्रताप सिंह सभी पार्षदों को शपथ दिला रहे थे। शपथ ग्रहण समारोह के खत्म होने के बाद जैसे ही सब लोग उठे, दर्शक दीर्घा में बैठे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देवेंद्र सिंह बबला और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला आमने-सामने हो गए। बबला ने आरोप लगाया कि चावला की वजह से ही चंडीगढ़ में कांग्रेस का पतन हुआ है। चंडीगढ़ में कांग्रेस को खत्म करने के पीछे वही हैं। मामला इतना बढ़ गया कि बबला ने सुभाष चावला को गाली और धमकी तक दे दी और उनकी तरफ बढ़ने की कोशिश की लेकिन समर्थक उन्हें एक-दूसरे से अलग ले गए। दर्शक दीर्घा में अन्य पार्टियों के कई नेता भी मौजूद थे।
इस दौरान चावला ज्यादा कुछ नहीं बोले। कहा कि किसी के कह देने से पार्टी खत्म नहीं होती। बाद में अनुशासनात्मक कार्रवाई के सवाल पर चावला ने कहा कि वह देखेंगे कि बबला पर क्या कार्रवाई की जा सकती है। इस दौरान यह चर्चा भी रही कि बबला भाजपा में जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने इस बात से इंकार करते हुए कहा कि वह कांग्रेसी हैं और कांग्रेस में ही रहेंगे।
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नाराजगी की वजह पूछी तो बबला बोले- चावला ने मुझे घूरा क्यों?
बबला से नाराजगी की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि सुभाष चावला उन्हें घूर रहे थे। बबला ने यह भी कहा कि जो अध्यक्ष अपने बेटे को चुनाव नहीं जिता पाया, वह पार्टी को क्या जिताएगा। दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चावला के बेटे सुमित चावला भी इस नगर निगम चुनाव में धनास सीट से हारे हैं, जबकि बबला की पत्नी हरप्रीत कौर बबला चुनाव जीत गई हैं और वह सदन में पहुंची हैं। इसी शपथ ग्रहण को देखने के लिए बबला नगर निगम कार्यालय पहुंचे थे। पिछले कई दिनों ने दोनों के बीच अनबन की खबरें थीं, जो शनिवार को जगजाहिर हो गईं।
कोट
इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना ठीक नहीं
चुनावों में सीटें घटती-बढ़ती रहती हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के साथ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। अगर किसी को कोई नाराजगी है तो पार्टी की बैठक में चर्चा करनी चाहिए थी। सार्वजनिक मंच पर इस तरह का व्यवहार सभ्य लोगों को शोभा नहीं देता।
- सुभाष चावला, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
बात करने की कोशिश की तो वो गुस्सा हो गए
चुनाव के बाद प्रदेश अध्यक्ष ने किसी से बात नहीं की। मैंने बात करने की कोशिश की तो वो गुस्सा हो गए। मैंने उन्हें गाली नहीं दी। प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने न तो जीतने वाले पार्षदों को बधाई दी, न हारने वालों से बात की। चुनाव के बाद वो कहीं नहीं मिले, इसलिए जहां मिले उनसे बात करने की कोशिश की।
- देवेंद्र सिंह बबला, पूर्व पार्षद, कांग्रेस
वर्जन
सदन की मर्यादा को भंग नहीं करना चाहिए
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सदन की मर्यादा को बनाए रखना चाहिए था, ऐसी हरकत वरिष्ठ नेताओं को शोभा नहीं देती। अगर किसी के बीच की कोई निजी नाराजगी है तो उसे बाहर निपटाना चाहिए। शहर के हित, विकास, स्थिर प्रशासन और केंद्र से बेहतर तालमेल के लिए अगर भाजपा को कोई समर्थन देता है तो उसका स्वागत है।
- अरुण सूद, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
ये दो भाइयों की लड़ाई
ये कांग्रेस का अंदरूनी मामला है। मैं इसे दो भाइयों के बीच की लड़ाई मानता हूं। इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। चंडीगढ़ में जोड़-तोड़ और छलकपट की राजनीति खत्म होनी चाहिए। बबला और चावला का मनमुटाव जल्द ही दूर हो जाएगा। सभी पार्टियों को आम आदमी पार्टी का सहयोग करना चाहिए ताकि मेयर बनाया जा सके।
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- प्रेम गर्ग, प्रदेश संयोजक, आम आदमी पार्टी
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