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Teacher's Day: क्योंकि शिक्षक ही समाज का वास्तविक शिल्पकार होता है...

Tue, 05 Sep 2017 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Teacher's Day Special - फोटो : File Photo
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पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस हर साल पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि शिक्षक ही समाज का वास्तविक शिल्पकार होता है। उनसे उम्मीद की जाती है कि वह बच्चों को ऐसी शिक्षा दें, जिससे न सिर्फ उसका भविष्य सुधरे बल्कि पूरे समाज को एक दिशा मिले। शिक्षक कोई भी हो सकता है। वह आपके पैरेंट्स, स्कूल टीचर या फिर कोई किताब। कहने का मतलब यह है कि जो जीवन में आगे बढ़ने की सीख दे, मुसीबतों से लड़ने का जज्बा दें, वही असली शिक्षक होता है। शिक्षक दिवस पर ट्राइसिटी के लोगों से जानने की कोशिश की कि उनके प्रिय शिक्षक कौन हैं? और उनसे उन्हें क्या सीख मिली। किसी ने अपने पैरेंट्स को टीचर बताया तो किसी ने अपने अध्यापक को। आप भी पढ़िए। किसने क्या कहा?
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अजमेर स्थित मायो कॉलेज में बिताए हुए दिन मुझे आज भी याद हैं, हमारे प्रिंसिपल जैक गिबसन, जो एक प्रतिष्ठित इंसान भी थे। वे स्टूडेंट के प्रति बहुत समर्पित और सकारात्मक रहते थे। उनका यही गुण मुझे जिंदगी में बहुत आगे ले गया है। वे बताते थे कि जीवन में आगे कैसे बढ़ना है।
- वीपी सिंह बदनौर, पंजाब के गवर्नर एवं चंडीगढ़ के प्रशासक।

हर टीचर से प्रेरणा मिली है, लेकिन जब मैं 7वीं कक्षा में पढ़ती थी तो अंग्रेजी की टीचर महमूद अबदुल्ला द्वारा दी गई शिक्षाएं मुझे आज भी याद हैं। उनसे यह सीखने को मिला कि जो भी काम करें, वह लगाव से किया जाए, तभी काम करने का फायदा मिलता है। वह टीचर मुझे कक्षा में ही नहीं बल्कि बाहर भी समझाने के लिए ले जाती थी।
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- किरण खेर, सांसद।  

प्रोफेसर जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई। - फोटो : File Photo
मेरे पैरेंट्स ने मेरे जीवन में एक शिक्षक की भूमिका निभाई है। मेरी मां प्रोफेसर थीं, जिन्होंने मुझे बताया कि जीवन में ऊंचे ख्वाब देखना गलत नहीं है। बस उन सपनों को पूरा करने के लिए इंसान को ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए। मेरे पिता ने सच्चाई के पथ पर चलने के लिए प्रेरित किया।
- अनुराग अग्रवाल, होम सेक्रेटरी, चंडीगढ़।

जीवन के प्रथम गुरु मेरे माता-पिता हैं। उनसे जो मुझे संस्कार मिले वह मेरे संघर्ष में सही दिशा दिखाने के काम आ रहे हैं। माता-पिता द्वारा दी गई शिक्षा मेरे मन को दूषित न होने में अहम योगदान निभा रहे हैं। मेरे माता-पिता ने हमेशा मानवता के लिए काम करने की प्रेरणा दी है।
- संजय टंडन, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष।

प्राइमरी टीचर शिवराज सिंह नेगी ने मुझे सिखाया कि स्टूडेंट पर कैसे फोकस करना है। आई डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी डॉ. आईएस जैन ने समय का पालन और अनुशासन सिखाया। डॉ. अमोद गुप्ता ने समर्पण और हर फील्ड पर काम करने के लिए प्रेरित करना सिखाया। ये तीनों ही मेरी जिंदगी के असल टीचर हैं।
- प्रोफेसर जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई।

हिंदी की टीचर इंदु भटनागर मेरी फेवरेट टीचर रही हैं। उनकी सादगी, कम्युनिकेशन स्किल्स और सकारात्मक नजरिया मुझे बहुत प्रेरणा देता है। उनके इस गुणों की बदौलत मुझे अपने जीवन और कैरियर में बहुत सफलता मिली है। हर टीचर में ऐसे गुण होने चाहिए।
अमिताभ अवस्थी, डिप्टी डायरेक्टर पीजीआई

मेयर आशा जसवाल - फोटो : अमर उजाला
मेरी टीचर हेमलता नागपाल ही मेरी गुरु हैं। उनसे मैंने काम करने का जुनून सीखा है। उनका मानना था कि किसी भी काम की सफलता करने वाले के जुनून पर निर्भर करती है। यही मेरी सफलता का राज है। जो भी काम करता हूं पूरी लगन से करता हूं।
-टीपी सिंह, स्टेशन अधीक्षक चंडीगढ़। 

मेरे स्कूल प्रिंसिपल ही मेरे गुरु हैं। उनकी सीख थी कि हर चीज को दिमाग से सोचना, उस पर सवाल करना और खुद से उसका हल निकलना। ये सीख हमेशा मेरे काम आती है। उन्हीं के बदौलत आज हमारे क्लास के सभी स्टूडेंट्स अच्छी पोस्ट पर हैं।
-डॉ. गरिमा मित्तल, निदेशक शिक्षा विभाग हरियाणा।

मेरे पिता ही मेरे असली गुरु रहे हैं। उनके दिवंगत पिता रामदित्ता राम ने उन्हें सिखाया कि बेशक गर्दन कट जाए, लेकिन सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ना। यह भी सिखाया कि बेशक मंदिर या पाठ भले न करना लेकिन जो कर्म है, उसे ईमानदारी के साथ निभाना है।
-आशा जसवाल, मेयर नगर निगम।

मैं अंग्रेजी के मास्टर रमेश्वर की मार को कभी नहीं भूल सकता। शरारत करने पर वह घर तक  पीटने आ जाते थे, लेकिन मेरे पैरेंट्स ने कभी भी टीचर की डांट व मार पर हस्तक्षेप नहीं किया। पैरेंट्स की इसी बात को मैंने अपने बच्चों पर लागू कर रखी है। इसलिए मेरे बच्चे अनुशासित हैं।
- एनपी शर्मा, नगर निगम चीफ इंजीनियर।

- मिल्खा सिंह, धावक। - फोटो : amar ujala
मेरे टीचर डॉ. बलदेव ने मुझे मेहनती और समय का पाबंद बनाया है। उन्होंने कभी पैसे से प्यार नहीं किया। वे बहुत ही स्पष्टवादी हैं। उनका यह गुण मेरे अंदर भी है। मैं भी सीधा बोल देता हूं। समय पर ही अस्पताल पहुंचता है। एक टीचर ही स्टूडेंट को सही सीख देते हैं।
-डॉ. रवि गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, मेडिकल कॉलेज सेक्टर-32।

माता पिता ही मेरे गुरु हैं। उनकी प्रेरणा से ही जीवन में आगे बढ़ा हूं। स्कूल का समय हो या नौकरी। घर से निकलते वक्त मां एक ही सलाह देती थी कि किसी का बुरा न करना। जो भी काम करना, अच्छाई के लिए करना। मां की बातें आज भी मेरे जेहन में रहती हैं।
- जगदीप ढांडा, स्टेट अफसर, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण।

मेरी मां मेरी गुरु थीं। अब वह इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनकी सीख हमेशा मेरी जिंदगी को सच का साथ देने के लिए प्रेरित करती है। जब कभी मुश्किल घड़ी आती हैं, आंखें बंदकर उनकी बातें याद करती हूं। रास्ते खुद ब खुद निकल आते हैं।
-वंदना दिसोदिया, एडिशनल डायरेक्टर प्राथमिक शिक्षा हरियाणा।

मेरे टीचर की मार आज भी मुझे याद है। मार के डर ने मुझे बहुत सिखाया। आजकल तो टीचर्स की डांट पड़ने पर अभिभावक स्कूल में लड़ने पहुंच जाते हैं। टीचर बच्चों को अच्छाई के लिए डांटते हैं। अभिभावकों यह बात समझनी चाहिए।
- मिल्खा सिंह, धावक।

बलबीर सिंह सीनियर, ओलंपियन, हॉकी खिलाड़ी। - फोटो : File Photo
मेरे आदर्श मेरे कोच हरबेल सिंह रहे हैं। उनकी एक बात को कभी नहीं भूल सकता। वह कभी भी भगवान से खुद के लिए कुछ नहीं मांगते थे, बल्कि पूरी टीम के लिए दुआ करते थे। जो इंसान अपने टीचर की बात को भूल जाते हैं, उन्हें अर्श से फर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती।
- बलबीर सिंह सीनियर, ओलंपियन, हॉकी खिलाड़ी।

मुझे अपने एक टीचर यूएस कुशवाहा के साथ बेहद लगाव है। मैं उनकी मेहनत से काफी प्रभावित हूं। क्योंकि वे खुद पीएचडी नहीं हैं, लेकिन फिजिक्स में उन्हें महारत हासिल है। उनकी इस मेहनत और लग्न से मैं काफी प्रभावित रहा हूं। यही मुझे प्रेरणा भी देता है।
- प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर, वाइस चांसलर, पंजाब यूनिवर्सिटी।

गुरु दो शब्दों का एक ऐसा संगम है, जिसे पूर्ण रूप से परिभाषित करना असाधारण कार्य है। मेरे पहले गुरु माता-पिता हैं, उन्होंने बचपन से लेकर अब तक यही सिखाया कि किसी भी काम को छोटा नहीं समझना। अपने कार्य के प्रति लगन व ईमानदारी से रहना। मैंने आज तक इस शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया।
- डॉ. ओपी मिश्रा, आईपीएस, डीआईजी, यूटी।

मेरे जीवन में दो टीचरों का अहम योगदान है। सातवीं क्लास में मेरे शिक्षक बलराज द्विवेदी ने कहा कि अव्वल पढ़ाई के साथ सामाजिक समझ ही इंसान को महान बनाता है। इसी तरह 10वीं में जब देरी से स्कूल पहुंचता था तो टीचर डॉ. भटनागर पैरेंट्स को मैसेज दिया करते थे। उसके बाद मुझे समय की अहमियत पता चली।
प्रोफेसर केएन. पाठक, पूर्व वाइस चांसलर, पंजाब यूनिवर्सिटी।

हरमोहन धवन, पूर्व केंद्रीय मंत्री। - फोटो : File Photo
पहले तो मेरे गुरु मेरे स्व. माता-पिता जगजीत सिंह व हरभजन कौर हैं, जिन्होंने मेरा हर कदम पर साथ दिया। इस कड़ी में दूसरा नाम प्रिंसिपल स्वर्ण चौधरी व प्रोफेसर अविनाश चंद्र का आता हैं। जिन्होंने केवल हमें किताबी ज्ञान ही नहीं दिया। बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया।
- मनजीत सिंह सेठी, डिप्टी मेयर, मोहाली।

जब मैं पीपीएस नाभा में पढ़ाई कर रहा था। उस समय हमारी इकनोमिक्स की टीचर मीना थापर ऐसा पढ़ाती थी, जिससे सारे बेसिक क्लीयर हो जाते थे। उनका पढ़ाया सब कुछ जीवन में काम आ रहा है। उन्होंने युवा पीढ़ी को भी संदेश दिया कि वह अपने टीचरों का हमेशा सम्मान करें। क्योंकि टीचर ही हमेशा सही राह दिखाते हैं।
-अमरोज सिंह, डीएसपी हेडक्वार्टर।

मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के जीवन में टीचरों का सहयोग हमेशा रहता है। आज मैं जिस भी मुकाम पर हूं, उसमें मेरे टीचरों का अहम योगदान है। इंजीनियरिंग कॉलेज के एचओडी डॉ. भास्कर राव उनमें से एक है। जिन्होंने हमेशा उन्हें सही राह दिखाई है। जिसकी वजह से यहां तक पहुंच पाए है।
-संजीव वशिष्ट, पूर्व एमआईए प्रेसिडेंट।

आज जो भी हूं, टीचर की बदौलत हूं। वर्ष 1965 में एमएससी करने के बाद बाटनी के हेड डॉ. पीएन मेहरा ने एक अमेरिकन प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी। उस प्रोजेक्ट के बदौलत कश्मीर से लेकर नेपाल तक की वनस्पति को जानने का मौका मिला। जो आज मेरे के लिए काफी काम आ रही हैं।
- हरमोहन धवन, पूर्व केंद्रीय मंत्री।
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- फोटो : File Photo
मेरी जिंदगी में मेरे टीचरों का अहम योगदान रहा है। उन्होंने बताया था कि मेहनत और ईमानदारी ही सफल जिंदगी का सूत्र है। मैं कोई भी काम करता हूं तो उसे पूरी लगन और ईमानदारी से करता हूं। मेरा मानना है कि अपने टीचर को कभी नहीं भूलना चाहिए।
- सुंदर लाल नौटियाल, बीडीपीओ चंडीगढ़।

मेरे शिक्षक ने मुझे सिखाया कि किसी से कड़वा मत बोलो। यही शब्द अपनी जिंदगी उतार लिए हैं। मीठे बोल भी सफलता की एक कुंजी है। कुछ भी हो जाए मैं दूसरों से कभी भी कड़वा नहीं बोलता। ये मेरे टीचर की सबसे बड़ी सीख थी।
-राजेश गुप्ता, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम चंडीगढ़।

मुझे मेरे उस्ताद पंडित रामचंद्र उपाध्याय से भ्रष्टाचार के खिलाफ  लड़ने की शिक्षा मिली। वर्ष 2011 में मुझे यह एहसास हुआ के शिक्षा विभाग चंडीगढ़ यूटी टीचरों से नाइंसाफी कर रहा है। छात्रों को स्मार्ट सुविधा नहीं मुहैया कराई जा रही है। तब मैने एक शिक्षक होने के नाते छात्रों के हित के मुद्दे उठाए।
- स्वर्ण सिंह कंबोज, तबला वादक , जीजीएमएसएसएस-20 ।

मेरे शिक्षक ठाकुर सिंह ने मुझे सीख दी है कि अपना काम पूरी लगन से करो। जो अपेक्षाएं हैं, उसमें खरा उतरो। दूसरों को आपसे क्या अपेक्षाएं हैं, उसे समझों और उसमें खरा उतरो। जब भी काम के प्रति लापरवाही व सुस्ती आती है तो सरदार ठाकुर सिंह के शब्द कान में गूंज जाते हैं।
- सत्यपाल जैन, एडिशनल सालिसिटर, पूर्व सांसद।
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