याची पक्ष की दलील
हाईकोर्ट को बताया गया कि पीठासीन अधिकारी ने मतों की गिनती के दौरान कांग्रेस-आप के पार्षदों के मतपत्रों पर पेन से खुद ही निशान लगाकर इन्हें अवैध घोषित कर दिया। यह वीडियो टीवी पर चला और पूरे देश ने देखा कि कैसे लोकतंत्र की हत्या की गई। वोटों की गिनती के दौरान याची पक्ष के लोगों को उन्होंने अपने पास तक नहीं आने दिया। चुनाव को निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से करवाने की अंडरटेकिंग देने के बाद भी प्रशासन इसमें विफल रहा।
प्रशासन की दलील
चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि यह याचिका वैध ही नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं के पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं बावजूद इसके हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसके साथ ही यह भी बताया कि चुनाव से जुड़ा रिकॉर्ड सेफ रूम में रखा गया है।
डीजीपी की दलील
हाईकोर्ट को डीजीपी की ओर से बताया गया कि चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था से जुड़ी किसी भी तरह की कोई शिकायत याचिका में ही मौजूद नहीं है। कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव करवाए गए हैं और ऐसे में उनकी इस याचिका में कोई भूमिका नहीं है।
किसी भी राहत से हाईकोर्ट का इन्कार
याची पक्ष ने हाईकोर्ट से कहा कि याचिका लंबित रहते चुनाव के परिणाम पर रोक लगाई जाए लेकिन हाईकोर्ट ने इससे इन्कार कर दिया। इसके बाद निवेदन किया गया कि मनोज सोनकर के मेयर के तौर पर कार्य करने पर रोक लगाई जाए लेकिन इसके लिए भी हाईकोर्ट ने मना कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले यूटी प्रशासन को पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। उनका जवाब आने के बाद ही किसी भी प्रकार की राहत को लेकर फैसला लिया जाएगा।