नगर निगम चंडीगढ़ के मेयर पद के लिए बीते आठ जनवरी को हुए चुनाव का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। आम आदमी पार्टी से मेयर पद की उम्मीदवार रहीं अंजू कत्याल समेत तीन लोगों ने भाजपा प्रत्याशी सरबजीत कौर के चुनाव को चुनौती देते हुए इसे रद्द कर दोबारा चुनाव करवाने की मांग की है। इस याचिका पर हाईकोर्ट बुधवार को सुनवाई कर सकता है।
आम आदमी पार्टी की पार्षद अंजू कत्याल, पार्षद प्रेमलता और राम चंदर यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि चंडीगढ़ नगर निगम के 35 वार्डों के लिए 24 दिसंबर को चुनाव हुए थे। 27 दिसंबर को चुनाव के नतीजे घोषित किए गए, जिसमें आम आदमी पार्टी सबसे बड़े दल के तौर पर सामने आई। आम आदमी पार्टी को 14, भाजपा को 12 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली थीं।
एक सीट शिअद के खाते में गई थी। बाद में कांग्रेस की एक पार्षद हरप्रीत कौर बबला अपने पति पूर्व पार्षद देवेंद्र सिंह बबला के साथ भाजपा में शामिल हो गई थीं। सांसद किरण खेर का एक वोट मिलाकर भाजपा के पास 14 वोट हो गए। इस तरह दोनों दलों के 14-14 वोट हो गए थे। इसके बाद मेयर पद के लिए आठ जनवरी को चुनाव करवाया गया।
आम आदमी पार्टी सबसे बड़ा दल था। बावजूद इसके मतदान प्रक्रिया के बाद चुनाव अधिकारी ने आम आदमी पार्टी के एक वोट को अवैध करार देकर रद्द कर दिया और भाजपा की उम्मीदवार सरबजीत कौर को मेयर पद पर विजयी घोषित कर दिया। इस नतीजे को लेकर उस समय काफी विवाद भी हुआ था। इसी चुनाव को अब आप के उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इसे रद्द कर नए सिरे से मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए दोबारा चुनाव करवाए जाने की मांग की है। इस याचिका पर हाईकोर्ट बुधवार को सुनवाई कर सकता है।