यूटी के प्रशासक शिवराज पाटिल ने प्रशासन के अधिकारियों से ड्राफ्ट मास्टर प्लान को आठ दिन में पूरा करने का निर्देश तो दे दिया, लेकिन प्रशासन के अधिकारी भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आठ दिनों में मास्टर प्लान का ड्राफ्ट कैसे फाइनल हो सकता है।
मास्टर प्लान को फाइनल करने के लिए इसमें लोगों की ओर से दिए गए कई सुझावों को भी शामिल करना है। साथ ही सलाहकार समिति के सदस्यों ने जो बहुमूल्य सुझाव दिए हैं उन्हें भी शामिल करना है।
प्रशासन के अधिकारियों ने पहले मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को फाइनल करने में ही कई साल लगा दिए और इसके बाद लोगों की ओर से आए सुझावों और आपत्तियों पर विचार के लिए गठित बोर्ड ऑफ इनक्वायरी ने रिपोर्ट तैयार करने में छह माह लगा दिए।
ऐसे में आठ दिनों में मास्टर प्लान फाइनल करना अधिकारियों के लिए चुनौती है। हालांकि पिछले दो दिनों से प्रशासन के अधिकारी मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को फाइनल करने में जुटे हैं। डेडलाइन के तहत 8 जुलाई तक मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को फाइनल किया जाना है।
यह पहला मौका नहीं है जब पाटिल ने प्रशासन के अधिकारियों को मास्टर प्लान के संबंध में डेडलाइन दी थी। प्रशासन के अधिकारी जब मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को तैयार करने में देरी कर रहे थे तब भी पाटिल ने कई बार उन्हें फटकार लगाते हुए एक निर्धारित सीमा में ड्राफ्ट तैयार करने को कहा था। लेकिन, प्रशासन के अधिकारियों ने कभी भी इस डेडलाइन का पालन नहीं किया।
ध्यान रहे कि सोमवार को यूटी गेस्ट हाउस में सलाहकार समिति की आठवीं बैठक में सभी सदस्यों के सुझाव सुनने के बाद पाटिल ने अधिकारियों को यह निर्देश दिए थे कि आठ दिनों में मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फाइनल किया जाए।
पाटिल का तर्क था कि ड्राफ्ट को तय करने में पहले ही काफी देरी हो चुकी है और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से प्रशासन को कई बात फटकार पड़ चुकी है। अब 4 अगस्त को इसकी अगली सुनवाई होनी है और पाटिल चाहते हैं कि उन्हें हाईकोर्ट से इस बार एक्सटेंशन न मांगनी पड़े।