ठंड का मौसम हो और स्टाइलिश लुक में भी रहना हो, ये भला कौन नहीं चाहेगा। अगर ऐसी ही ट्रेंडी और स्टाइलिश लुक में दिखना हो तो इस एक्सपो में आएं। किसान भवन में 9 से 20 नवंबर तक सिल्क एक्सपो का आयोजन किया गया है। यहां पर आपको सर्दी के हिसाब से जैसे भी कपड़े चाहिए, जरूर मिलेंगे। बता दें कि इसका आयोजक दिल्ली का मशहूर ‘के’ ग्रुप है। इसमें कपड़ो की विभिन्न वैरायटियां मौजूद हैं। इनमें सिल्क सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है।
यही वजह है कि एक्सपो में आने वाले सिटी के खरीदार इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। खास बात यह है कि किसान भवन में भारत के अलग-अलग हिस्सों से आया हुआ सिल्क मौजूद है। इसमें एरी, मूगां, मलवरी, टरसर, भागलपुरी खास रूप से पसंद किया जा रहा है। यहां मधुबनी आर्ट भी देखने को मिल रही है। एक्सपो के आर्गेनाइजर राजेश ने बताया कि एक्सपो का आयोजन इन दिनों शादियों के सीजन को मद्देनजर रखकर किया गया है। एक्सपो में लगभग 50 से 70 व्यापारियों ने अपने स्टॉल लगाए हैं।
ऐसे पहचानें असली सिल्क
सिल्क जैसा दिखने वाला या सिल्क के नाम पर कई तरह का कपड़ा मार्केट में उतारा जाता है। ताकि लोगों को सिल्क के नाम पर ठगा जा सके। लेकिन सिल्क की अपनी खासियत है, जो किसी कपड़े में नहीं पाई जाती। ऐसे में सिल्क की पहचान होना खरीदार के लिए बहुत जरूरी है। असली सिल्क का पता लगाना हो तो अपने एक बाल और सिल्क को जलाकर देखें। जैसी प्रतिक्रिया बाल जलने पर देता है, ठीक उसी प्रकार सिल्क भी जलता है। यह धागे के जलने से बिलकुल अगल है।
अब आता है 4 प्लाई का सिल्क
सिल्क कितने प्लाई का होता है, यह सिल्क की जानकारी रखने वाले बाखूबी जानते हैं। फिर भी बता दें कि पहले दो प्लाई का सिल्क आता था, अब 4 का आता है। कहा जाता है कि सिल्क पश्चिमी बंगाल में बनना शुरू हुआ और इससे 7000 से लेकर 15000 तक की कीमत के परिधान तैयार किए जा सकते हैं। एक्सपो में आए व्यापारी डीसी कौशिक ने बताया कि जो सिल्क पहले आता था, उसे हाथ से तैयार किया जाता था और आज का सिल्क मशीनों से तैयार होता है। यह मेहनत का काम है।
सिल्क पर भारी नहीं पड़ी जीएसटी
व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी से सिल्क पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। इसे जितना पहले पंसद किया जाता था उतना ही आज लोग इसे पसंद करते हैं। लोगों को सिल्क पहनना पंसद है, यही वजह है कि महंगई के इस दौर में सिल्क शान से खरीदा जाता है।