चंडीगढ़। शहर की सड़कें इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। प्रशासन की बिटुमेन तारकोल खरीद नीति के कारण सड़कों के डामरीकरण का काम ठप है। सरकारी कंपनियों के पास बिटुमेन की भारी किल्लत है जिससे ठेकेदारों को आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
इस मामले में अब राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और पार्षद योगेश ढींगरा ने शहर की बदहाल सड़कों को लेकर रोष जताया है। उन्होंने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया को पत्र लिखा है। पत्र में इस नीति में तुरंत बदलाव करने की मांग की गई है। पार्षद ने कहा कि चंडीगढ़ में अब सड़कों में गड्ढे नही बल्कि गड्ढों में सड़कें दिखती हैं।
यह पहली बार है जब पड़ोसी शहर मोहाली की सड़कें चंडीगढ़ से बेहतर हैं। जनता नई गाड़ियां खरीदने पर लाखों रुपये का सड़क कर चुकाती है। इसके बावजूद उन्हें टूटी-फूटी और जानलेवा सड़कों पर सफर करना पड़ रहा है। यह शहर के बुनियादी ढांचे पर एक बड़ा सवाल है।
बिटुमेन संकट का कारण
चंडीगढ़ प्रशासन की नीति के अनुसार, ठेकेदारों को केवल आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सरकारी कंपनियों से बिटुमेन खरीदना अनिवार्य है। इन सरकारी कंपनियों के पास इस समय बिटुमेन का भारी भंडार संकट है। वे ठेकेदारों को सामग्री की आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। आपूर्ति न होने के कारण ठेकेदारों ने डामरीकरण का काम रोक दिया है। इससे जगह-जगह टूटी सड़कें हादसों को न्योता दे रही हैं।
मानसून से पहले नीति बदलने की गुहार
सड़क निर्माण के जानकारों और पार्षदों का कहना है कि जून का महीना डामरीकरण के लिए सबसे उपयुक्त है। इसके बाद मानसून की शुरुआत होते ही बारिश के कारण सड़कों का काम कई महीनों के लिए रुक जाएगा। राज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि इस नियम को बदला जाए। ठेकेदारों को खुले बाजार या अन्य प्रमाणित कंपनियों से बिटुमेन खरीदने की छूट दी जाए।