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Chandigarh: अपनी जरूरत के हिसाब से फायर एक्ट बनाएगा चंडीगढ़, केंद्र के मॉडल को बनाया जाएगा आधार

Thu, 30 Nov 2023 02:13 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

वर्तमान में चंडीगढ़ का फायर विभाग दिल्ली फायर एक्ट, उसके रूल्स और नेशनल बिल्डिंग कोड-2016 के सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही एनओसी जारी करता है। नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) वो मानक नियम हैं, जिनका अथॉरिटी और कंस्ट्रक्शन कंपनियां पालन करती हैं।
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Chandigarh Fire - फोटो : फाइल
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विस्तार
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जरूरत के अनुसार पहली बार चंडीगढ़ अपना फायर एक्ट बनाने जा रहा है। इस पर काम शुरू हो गया है। अभी शहर दिल्ली के एक्ट को फॉलो करता है। केंद्र सरकार के मॉडल बिल ऑन मेंटेनेंस ऑफ फायर एंड इमरजेंसी सर्विस-2019 को आधार बनाकर चंडीगढ़ के लिए एक्ट का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसमें चंडीगढ़ की जरूरत के अनुसार बदलाव किए जाएंगे।

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केंद्र शासित प्रदेश होने की वजह से चंडीगढ़ पहले दिल्ली अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम-1986 को फॉलो करता था। दिल्ली ने 2007 में कई संशोधन करके दिल्ली अग्निशमन सेवा अधिनियम-2007 बना लिया। वर्तमान में चंडीगढ़ इसी को फॉलो करता है। 

इस बीच वर्ष 2019 में केंद्र सरकार मॉडल बिल ऑन मेंटेनेंस ऑफ फायर एंड इमरजेंसी सर्विस-2019 लेकर आई और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को दिशा निर्देश जारी किए गए कि वह इस बिल के आधार पर अपने फायर एक्ट बना सकते हैं। जिन राज्यों में विधानसभाएं हैं, उन्होंने अपने एक्ट बना लिए लेकिन केंद्र शासित प्रदेश होने की वजह से चंडीगढ़ ऐसा नहीं कर पाया। 

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एक्ट का ड्राफ्ट बनाने का काम शुरू
प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर इसको लेकर बैठक हुई। फैसला लिया गया कि चंडीगढ़ अपना एक्ट बनाएगा और फिर उसे संसद से पास कराया जाएगा। फायर विभाग ने एक्ट का ड्राफ्ट बनाने पर काम शुरू कर दिया है। विभाग की कोशिश है कि जनवरी 2024 तक ड्राफ्ट तैयार कर सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट को भेज दिया जाए। इसके बाद यह ड्राफ्ट प्रशासन के कानूनी विभाग को भेजा जाएगा।

कानूनी विभाग की आपत्तियों को दूर करने में कुछ महीने निकल जाएंगे। इसके बाद एक्ट को पास करने के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। संसद में पेश कर वहां से पास होने के बाद ही इस एक्ट को चंडीगढ़ में लागू किया जा सकेगा। माना जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में एक से दो साल तक का समय लग सकता है।

एनबीसी के मानक सख्त, पालन करना बहुत मुश्किल
वर्तमान में चंडीगढ़ का फायर विभाग दिल्ली फायर एक्ट, उसके रूल्स और नेशनल बिल्डिंग कोड-2016 के सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही एनओसी जारी करता है। नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) वो मानक नियम हैं, जिनका अथॉरिटी और कंस्ट्रक्शन कंपनियां पालन करती हैं ताकि सभी लोगों को सुरक्षित और स्वस्थ अनुभव मुहैया कराया जा सके। 

हालांकि शहर के सभी उद्योगपतियों और व्यवसायियों का कहना है कि एनबीसी के मानक काफी सख्त है। जमीनी स्तर पर उसे लागू करना असंभव है। इस वजह से ही चंडीगढ़ के कई इमारत, उद्योग व अन्य भवनों को फायर एनओसी नहीं मिल पाती। 

उम्मीद है कि अगर चंडीगढ़ अपना एक्ट बनाएगा तो उसमें चंडीगढ़ की हेरिटेज स्थित, स्थानीय इमारतों की जरूरत आदि का ख्याल रखा जाएगा ताकि एनओसी के लिए लोगों को ज्यादा समस्या नहीं आएगी। बता दें कि सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं, दिल्ली-मुंबई समेत कई राज्य एनबीसी के सख्त मानकों को लेकर चिंता जता चुके हैं। इसमें संशोधन की मांग की जा रही है।

कई बड़ी इमारत, स्कूल आदि के पास फायर एनओसी नहीं
हाल ही में चंडीगढ़ फायर विभाग ने 15 मीटर से ऊंची सभी इमारतों का सर्वे किया था। सामने आया था कि चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा विधानसभा, सिविल सेक्रेटेरिएट और हाईकोर्ट जैसी हेरिटेज इमारत के पास भी फायर एनओसी नहीं है। 15 मीटर से ऊंची सिर्फ 80 इमारतें हैं, जिनके पास एनओसी है। जबकि 262 इमारतों ने आवेदन ही नहीं किया और 78 इमारतों के आवेदन लंबित हैं। सेक्टर-17 में सबसे ज्यादा ऐसी इमारतें हैं, जिनके पास फायर की एनओसी नहीं है। इसके अलावा भी कई बड़ी इमारत, स्कूल आदि के पास एनओसी नहीं है।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर फायर विभाग चंडीगढ़ के लिए फायर एक्ट पर काम कर रहा है। विभाग की कोशिश है कि जनवरी 2024 तक ड्राफ्ट तैयार कर प्रशासन को भेज दिया जाए। - गुरिंदर सिंह सोढी, चीफ फायर ऑफिसर, चंडीगढ़
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