एक दिन की हड़ताल थी। उस समय करीब तीन सौ कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जलापूर्ति बहाल करने के लिए सेना को बुलाया गया था लेकिन जब सेना से भी जलापूर्ति ठीक से नहीं हो सकी, तब कर्मचारियों के जेल से छोड़ा गया। कोर्ट में कई वर्षों तक केस चला, जिसके बाद सभी कर्मचारी बरी हो गए थे।
1992 में 280 डेली वेज कर्मचारियों को किया गया था बर्खास्त
कोआर्डिनेशन कमेटी के महासचिव राकेश कुमार ने बताया कि कोआर्डिनेशन कमेटी की अगुवाई में वर्ष 1992 में 23 सितंबर को पब्लिक हेल्थ के कर्मचारियों ने डेली वेज कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को लेकर हड़ताल की थी। उस दौरान 280 डेली वेज कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया था, जबकि 11 नियमित कर्मचारियों (जो नेता थे) को टर्मिनेट कर दिया गया था। इसकी अगुवाई कोआर्डिनेशन कमेटी के तत्कालीन संयोजक रमेश कांत ने की थी। उस वक्त राकेश कुमार कोआर्डिनेशन कमेटी के सह संयोजक थे।
राजनीति के चक्कर में लोगों की परेशानियां भूलीं पार्टियां
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी बिजली निजीकरण का विरोध कर कर्मचारियों का साथ देने का ढोंग रच रही हैं। कांग्रेस शासित मुंबई ने बिजली का निजीकरण कर दिया है और आप शासित दिल्ली में भी बिजली का निजीकरण किया गया है। दोनों पार्टियों ने 72 घंटे के लिए बिजली आपूर्ति के ब्रेकडाउन का समर्थन कर लोगों को परेशानी में डाला है। - अरुण सूद, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
प्रशासन को कर्मचारियों ने लगभग एक सप्ताह पहले हड़ताल की सूचना दे दी थी। प्रशासन की लापरवाही के कारण लोगों को समस्या हुई। अधिकारियों को अपनी तैयारी रखनी चाहिए थी। अब अपनी नाकामी को कर्मचारियों के ऊपर डालने की प्रयास किया जा रहा है। - प्रेम गर्ग, प्रदेश अध्यक्ष, आप
प्रशासन के अधिकारियों को अपनी रणनीति बनानी चाहिए थी। पहले कर्मचारियों के साथ धोखा किया गया, अब जब अपनी लापरवाही से लोगों को समस्या हुई तो उसकी जिम्मेदारी भी लोगों को पर डाली जा रही है। एस्मा लगाने से विरोध खत्म नहीं होगा, हम कर्मचारियों के साथ हैं। - सुभाष चावला, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
प्रशासन को हड़ताली कर्मचारियों से बात करनी चाहिए। उनकी बातों को मानना चाहिए था। एस्मा लगाना ठीक नहीं है। यह तानाशाही है। इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन की नाकामी से ही लोगों को समस्या हुई। - हरदीप सिंह, प्रदेश अध्यक्ष व पार्षद शिरोमणि अकाली दल
उम्मीद है कर्मचारी जल्द हड़ताल को लेंगे वापस
यूटी प्रशासक ने बिजली कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि निजीकरण के बाद भी उनकी नौकरी को कोई खतरा नहीं होगा। उनके पे स्केल, रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कुछ बदला नहीं जाएगा। उनके घर भी रहेंगे। इसके अलावा निजीकरण के बाद कंपनी विभाग में निवेश करेगी, जो बेहतरी के लिए होगा। इसलिए कर्मचारियों को रोड़ा नहीं अटकाना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि कर्मचारी जल्द हड़ताल को वापस लेंगे। - संजय टंडन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा