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चंडीगढ़: वर्षों से किराया जमा न कराने वालों पर सीएचबी की सख्ती, पांच दिन की दी मोहलत, उसके बाद होगी कार्रवाई

Fri, 06 May 2022 03:16 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

वर्षों से किराया न देने पर सीएचबी ने वर्ष 2019 में 119 मकानों का आवंटन रद्द कर दिया था, लेकिन कुछ महीनों बाद आए कोविड की वजह से खाली नहीं कराया जा सका। इनमें से कइयों ने अब तक किराया नहीं जमा किया है इसलिए अब सीएचबी ने इन मकानों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वर्षों से किराया जमा न करने वालों पर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। सीएचबी के कर्मचारी भारी पुलिस बल के साथ सेक्टर-56 के पांच स्मॉल फ्लैट को सील करने पहुंचे लेकिन लोगों ने कर्मचारियों से आग्रह किया कि वो उन्हें एक आखिरी मौका दें। इसके बाद बोर्ड ने अब सभी को पांच दिन का समय दिया है। सीएचबी के अधिकारियों का कहना है कि अगले हफ्ते से मकानों को सील किया जाएगा और खाली करने की कार्रवाई होगी। 

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वर्षों से किराया न देने पर सीएचबी ने वर्ष 2019 में 119 मकानों का आवंटन रद्द कर दिया था, लेकिन कुछ महीनों बाद आए कोविड की वजह से खाली नहीं कराया जा सका। इनमें से कइयों ने अब तक किराया नहीं जमा किया है इसलिए अब सीएचबी ने इन मकानों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस की मौजूदगी में पांच मकानों को सीएचबी ने सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी, लेकिन लोगों के आग्रह पर उन्हें फिलहाल के लिए राहत दी गई। 

लोगों ने लिखित में दिया कि वो जल्द बकाया राशि को जमा करा देंगे। दरअसल, मार्च 2022 में सीएचबी ने 11 हजार 641 लोगों को शोकॉज नोटिस भेजा है। इसमें सबसे ज्यादा धनास के हैं। नोटिस में 31 मार्च तक का समय दिया गया था, लेकिन लोगों की सुविधा को देखते हुए समय को आगे बढ़ाया गया। हालांकि अब सीएचबी ने मकानों को रद्द करने और खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीएचबी के सीईओ यशपाल गर्ग ने कहा कि स्मॉल फ्लैट्स स्कीम के तहत उन आवंटियों को नोटिस भेजा गया है जिन पर 10 हजार रुपये से ज्यादा का किराया बकाया है।

एक बार मकान रद्द हुआ तो झेलनी पड़ेगी परेशानी

सीईओ गर्ग ने कहा कि एक बार आवंटन रद्द हो गया तो उसमें रहने वाले आवंटी को मकान खाली करना होगा। अगर अपीलीय प्राधिकारी इसकी बहाली की अनुमति देता है तो आवंटी को सभी लंबित देय राशि, ब्याज और रिवाइवल शुल्क का भी भुगतान करना होगा। हालांकि सीएचबी के नोटिस के बाद कुछ लोगों ने किराया जमा किया है और मार्च माह में 8 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं लेकिन ज्यादा संख्या में आवंटियों ने अभी भी किराया नहीं दिया है। ऐसे लोगों के खिलाफ जल्द कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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