चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) की सेक्टर-63 की जनरल सेल्फ फाइनेंसिंग हाउसिंग योजना की लांचिंग के लगभग छह साल बाद भी सफल अलॉटियों को फ्लैट की पॉजिशन नहीं मिली। ऐसे बहुत से अलॉटी हैं जो हर माह ऋण की किश्त भी अदा कर रहे हैं और मकान का किराया भी।
सीएचबी के अधिकारी भी अलॉटियों को यह जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि फ्लैट का पॉजिशन कब मिलेगा? सीएचबी ने अलॉटियों से पूरा पैसा ले लिया गया है, लेकिन तय समय पर मकान की पॉजिशन नहीं मिली है। अब इन अलॉटियों को फ्लैट के लिए छह माह का इंतजार और करना पड़ सकता है।
सीएचबी की यह हाउसिंग स्कीम अप्रैल, 2008 में लांच हुई थी और इस स्कीम के तहत आवेदन करने वाले 20 हजार से ज्यादा आवेदकों का प्रारंभिक ड्रा जुलाई, 2008 में निकाला था। इसके बाद नवंबर, 2008 में फाइनल ड्रा निकाला गया।
सीएचबी ने चरणबद्ध तरीके से इन फ्लैटों का निर्माण कार्य अप्रैल, 2011 में शुरू करा दिया था। लेकिन, निर्माण कार्य शुरू होने के लगभग तीन साल बाद भी सीएचबी को ठेकेदारों से फ्लैट नहीं मिले।
इस आवासीय योजना के तहत कुल 2108 फ्लैटों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से 888 टू बेडरूम, 336 थ्री बेडरूम, 564 वन बेडरूम और 320 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बनाए जाने हैं।
सीएचबी की यह पहली आवासीय योजना है, जो पांच मंजिला है। दो बेडरूम फ्लैटों को तीन वर्गों में बांटा गया था। इसमें 260, 240 और 388 फ्लैट थे। इनमें से 388 फ्लैटों का निर्माण अभी शुरू होना है।
हालांकि, दो अन्य वर्गों के फ्लैटों का निर्माण पूरा हो गया है। थ्री बेडरूम फ्लैट दो वर्गों में बांटे गए थे। इनमें 216 और 120 फ्लैट बनने थे और इनका कार्य अंतिम चरण में है। इसी तरह वन बेडरूम फ्लैट भी दो वर्गों में बांटे गए हैं। इनका निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है।
ध्यान रहे कि सेक्टर-37 निवासी सुभाष चंद ने लगभग तीन माह पहले चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल से फ्लैट दिलाने की मांग उठाई थी। सुभाष ने पाटिल से मुलाकात का समय भी मांगा था। लेकिन, किसी वजह से वह 6 जनवरी को हुई जन सुनवाई सत्र में नहीं आ पाए थे।
सीएचबी की इस आवासीय योजना के लिए कांट्रेक्टर को सीएचबी की तरफ से पूरे पैसे दे दिए गए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि कांट्रेक्टर से जल्द पोजेशन मिल जाएगा। इसके बाद सीएचबी अलॉटियों को फ्लैट का पोजेशन दे दे देगा।
सत्यगोपाल, चेयरमैन, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड