बैठने तक की व्यवस्था बदहाल, हाईटेक करने के दिखा रहे सपने
प्रशासन शहर के जिन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को हाईटेक और मॉडल बनाने का दावा कर रहा है, उनमें से कई सेंटरों में तो कर्मचारियों और डॉक्टरों तक के बैठने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। वह सीलन लगे कमरों में बैठकर घंटों ड्यूटी करने के लिए मजबूर है। इतना ही नहीं जरा सी बरसात में इन सेंटरों में घुटने तक पानी लग जा रहा है। ऐसे में बगैर भवन की व्यवस्था किए बिना कंप्यूटर खरीदने का ऑर्डर दे दिया गया है।
इंटरनेट और बिजली पर भी खूब हुआ खर्च
अगर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की मौजूदा स्थिति देखी जाए तो किसी भी सेंटर पर कंप्यूटर से काम नहीं किया जा रहा है लेकिन इनमें से ज्यादातर कंप्यूटरों को इंस्टॉल किया जा चुका है। उसके लिए बिजली और इंटरनेट पर भी तीन वर्षों से खर्च किया जा रहा है। क्योंकि तीन साल पहले ही इंटरनेट कंपनी ने केबिल बिछाकर कनेक्शन दे दिया है लेकिन सिर्फ डड्डूमाजरा और मौलीजागरां के सेंटर पर ही ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा संचालित की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग में मरीजों की सुविधा के नाम पर लगातार गड़बड़ियां सामने आ रहे हैं। आखिर जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के नाम पर कब तक सरकारी धन की बर्बादी की जाएगी। इसकी उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जानी बेहद जरूरी है। -दीपक शर्मा, बहलाना।
मेरा मानना है कि सरकारी अस्पताल में सामान्य बीमारियों का भी अगर इलाज हो जाए तो यह बहुत बड़ी बात है। ऐसे में टेलीकंसल्टेशन व टेलीमेडिसिन के झूठे सपने दिखाना जनता को धोखा देना है। इसके लिए लगातार बजट खर्च किया जा रहा है लेकिन धरातल पर भी कुछ भी नजर नहीं आ रहा। - आरती उपाध्याय, किशनगढ़।
पुराने कंप्यूटर आउटडेटेड हो चुके हैं इसलिए उनकी जगह पर 200 नए कंप्यूटर खरीदने का ऑर्डर दिया गया है। कंपनी को ऑर्डर दे दिया गया है। जल्दी आपूर्ति हो जाएगी। - डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य।