चंडीगढ़। शहर में बच्चे भी तेजी से कोरोना वायरस का शिकार हो रहे हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि बच्चे तेजी से संक्रमण को मात दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत मेटाबॉलिज्म सिस्टम से बच्चे कोरोना को तेजी से हरा रहे हैं। हालांकि बड़ों की लापरवाही के कारण उसी अनुपात में संक्रमण की चपेट में भी आ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि घर के बड़े सजग रहें। शहर में अब तक 0 से 18 वर्ष तक के कुल 5731 बच्चे, किशोर और युवा संक्रमण की चपेट में आए थे, जिनमें से 5157 ठीक हो चुके हैं।
पीजीआई के उन्नत बाल रोग केंद्र की कोविड-19 समिति की अध्यक्ष डॉ. जयश्री मुरलीधरन का कहना है कि 1 से 3 प्रतिशत बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ रही है। इससे यह साबित होता है कि ज्यादातर बच्चे होम आइसोलेशन में ही संक्रमण से मुक्त होने में सफल हो रहे हैं।
जीएमएसएच-16 के कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. हनी साहनी ने बताया कि जन्म से 18 साल के बीच के आयु वर्ग में संक्रमण दर से रिकवरी रेट ज्यादा तेज रहा है। यही वजह है कि शहर में 5000 से ज्यादा इस वर्ग में संक्रमित हो जाने के बावजूद मौजूदा समय में सक्रिय केसों की संख्या 566 रह गई है। डॉ. साहनी का कहना है कि बच्चों में अच्छी रिकवरी रेट का मुख्य कारण उनका मजबूत मेटाबॉलिज्म सिस्टम है, जिसके कारण वे संक्रमित होने के बाद तेजी से रिकवर होते हैं।
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2020 रहा ज्यादा घातक
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के लिए 2021 में तुलना में 2020 ज्यादा घातक सिद्ध हुआ है। इसमें 2020 में जहां जन्म से 18 साल की आयु वर्ग के 6 मरीजों ने कोरोना वायरस से जान गवाई है, वहीं 2021 में यह आंकड़ा महज दो है। मौजूदा समय में बच्चों में संक्रमण की दर 9.85 है, जबकि रिकवरी रेट 8.98 पर पहुंच गई है। वहीं अगर मृत्यु दर पर गौर किया जाए तो वह 0.13 रहा है।
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एक नजर संक्रमण के स्तर पर
अब तक इतने 0 से 18 वर्ष तक के लोग संक्रमित - 5731
अब तक इतने हुए ठीक-5157
एक्टिव केस की संख्या- 566
बच्चों की मौत- 8
कोट- बच्चों में संक्रमण दर वयस्कों की तुलना में काफी कम रही है लेकिन अब तक जितने बच्चे संक्रमित हुए हैं वह भी कोई कम संख्या नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि अभिभावक उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए बेहद सचेत रहें। इसे हल्के में लेने की गलती कतई न करें।
-डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक