चंडीगढ़ यूटी प्रशासन शहर के करीब 25 हजार वृद्ध, दिव्यांग और विधवाओं का मजाक उड़ा रहा है। शहर में एक सिलिंडर के दाम से भी कम बुजुर्गों और विधवाओं को मासिक पेंशन दी जा रही है। दो राज्यों की राजधानी व केंद्र शासित प्रदेश में पूरे उत्तर भारत में सबसे कम मात्र एक हजार रुपये पेंशन है, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में करीब इससे तीन गुना पेंशन मिलती है।
महंगाई के इस दौर में एक हजार रुपये पेंशन, नाम मात्र के समान है। ढलती उम्र में वृद्ध, दिव्यांग व असहाय विधवाओं को अपनों की नजर में उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। विभिन्न एसोसिएशन की तरफ से न जाने कितने ज्ञापन, कितने ही मांगपत्र प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं लेकिन नतीजा शून्य ही रहा है। पड़ोसी राज्यों में पेंशन बढ़ गई लेकिन चंडीगढ़ में लोगों को केंद्र शासित प्रदेश होने का खामियाजा उठाना पड़ रहा है।
यूटी प्रशासक की तरफ से बनाई गई समाज कल्याण समिति की तरफ से करीब तीन साल पहले पेंशन को बढ़ाकर एक हजार रुपये से दो हजार रुपये करने का प्रस्ताव भेजा गया था। प्रशासन ने इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा भी, लेकिन आज तक बुजुर्ग पेंशन के बढ़ने के इंतजार में बैठे हैं। समिति के अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद सत्य पाल जैन ने कहा कि समिति ने पेंशन दोगुनी करने के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजा था, जिसे केंद्र सरकार को भेजा गया है। जल्द से जल्द प्रस्ताव को मंजूरी दिलानी चाहिए ताकि शहर के करीब 25 हजार लोगों को फायदा मिल सके।
आखिरी बार 2016 में बढ़ी थी पेंशन, तब से हरियाणा सात बार बढ़ा चुका
यूटी प्रशासन ने आखिरी बार फरवरी 2016 में पेंशन बढ़ाई थी। सात साल पहले वृद्धावस्था पेंशन को 500 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये किया गया था। उसके बाद से एक भी बार पेंशन नहीं बढ़ी है। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत लगभग सभी राज्य कई बार पेंशन की राशि को बढ़ा चुके हैं। हरियाणा ने तो पिछले सात साल में सात बार पेंशन बढ़ाई है। 2016 में हरियाणा में पेंशन करीब 1400 रुपये थी जो अब 2750 रुपये है। अन्य राज्यों में भी तीन से चार बार पेंशन की राशि बढ़ चुकी है लेकिन प्रशासन व केंद्र शहर के बुजुर्गों के प्रति उदासीन बना हुआ है।
ये चंडीगढ़ की विडंबना कि दिल्ली में शोर मचाने वाले नेता नहीं
हर राज्य के चुनाव में पेंशन एक बड़ा मुद्दा होता है, क्योंकि किसी भी सरकार को बनाने और बिगाड़ने में पेंशनधारक बहुत बड़ी अहमियत निभाते हैं। इसलिए राज्य सरकार हर बार पेंशन को बढ़ाने के वादे करती है और कई बार बढ़ाए भी जाते हैं। चंडीगढ़ में उल्टा है। यहां अफसरशाही है। प्रस्ताव बनाकर दिल्ली भेज दिया गया। अब केंद्र के ऊपर है कि वो कितने साल बाद प्रस्ताव को पास करता है। लोगों का कहना है कि चंडीगढ़ की विडंबना है कि शहर में ऐसे नेता नहीं हैं जो दिल्ली में अपने कामों के लिए शोर मचा सके और मंत्रालय से फाइलें क्लियर करा सकें।
शहर में पेंशन की स्थिति
पेंशन वर्ग संख्या राशि (रुपये)
दिव्यांग 4650 1000 (0-69 फीसदी) और 2000 (70 फीसदी से ज्यादा)
विधवा 8592 1000 रुपये
वृद्धावस्था 12,192 1000 रुपये
पड़ोसी राज्यों में पेंशन
राज्य/यूटी - पेंशन राशि - पेंशनधारक
चंडीगढ़ - 1000 रुपये - 25.43 हजार
हरियाणा - 2750 रुपये - 17.85 लाख
पंजाब - 1500 रुपये - 29.29 लाख
हिमाचल प्रदेश - 1500 रुपये - 7.15 लाख
दिल्ली - 2000 रुपये - 4.5 लाख
पेंशन बढ़ाने के लिए मंत्रालय को काफी समय से प्रस्ताव भेजा हुआ है। पड़ोसी राज्यों और चंडीगढ़ के पेंशन में काफी अंतर आ गया है। मैं खुद इसको लेकर केंद्रीय गृह सचिव से बात करूंगा। इसे जल्द से जल्द बढ़ाया जाएगा।
- धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक