चंडीगढ़ को डेपुटेशन व्यवस्था की वजह से काफी नुकसान झेलना पड़ा है। अधिकारी आते हैं, अपने अनुसार योजना बनाते हैं और उसे लागू करने से पहले ही मूल कैडर में चले जाते हैं। दूसरे अधिकारी आते हैं, पुरानी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालकर नई योजनाओं पर काम शुरू कर देते हैं। इन कागजी योजनाओं के बीच शहर के लोग अपने मुद्दों को लेकर केवल प्रशासन की ओर ताकते रह जाते हैं।
अधिकतर शहरवासियों को लगता है कि प्रशासन में अधिकारियों के बीच 60:40 का अनुपात होना एक नियम है और इसका पालन करना जरूरी है जबकि ये सच नहीं है। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री एसबी चव्हाण ने संसद में एक तारांकित प्रश्न संख्या 208 के जवाब में कहा था कि पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट 1966 में कहीं पर भी यह प्रावधान नहीं है कि चंडीगढ़ में पदों को भरने के लिए पंजाब व हरियाणा से किसी अनुपात में कर्मचारियों को भर्ती किया जाएगा।
शहर में पीसीएस अधिकारी कई सालों से चंडीगढ़ में जमे हुए हैं। कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जो डेपुटेशन के तीन-तीन साल के दो कार्यकाल को पूरा कर चुके हैं। नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डेपुटेशन पूरा होने के बाद भी पंजाब सरकार अधिकारियों को वापस नहीं बुलाती। कई मामलों में प्रशासन भी अधिकारियों को वापस नहीं भेजना चाहता। दूसरी तरफ एचसीएस अधिकारियों का तीन साल का कार्यकाल पूरा होते ही हरियाणा सरकार उन्हें वापिस बुला लेती है। कुछ महीने पहले कुछ एचसीएस अधिकारियों ने हरियाणा सरकार से एक्सटेंशन मांगी थी। प्रशासन को भी कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन हरियाणा सरकार ने उनकी एक्सटेंशन को खारिज कर दिया और हरियाणा वापस बुला लिया।
केपीएस माही : वर्ष 2016 से डेपुटेशन प
प्रद्युमन सिंह : 3 मार्च 2021
शालिनी चेतल : 10 फरवरी 2022
विराट, रुचि सिंह बेदी, राधिका सिंह, मनीश लोहान, एसके जैन, तिलक राज, राजीव प्रसाद, डॉ. इंदर जीत।
यूटी कैडर: प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, सीएचबी सीईओ यशपाल गर्ग, शिक्षा सचिव एसएस गिल, कार्मिक सचिव नितिका पवार, खाद्य सचिव विनोद पी कावले, एसडीएम साउथ रुपेश कुमार, निदेशक आईटी पूर्वा गर्ग।