अनलॉक के बाद भी चंडीगढ़ की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौट पाई है। पिछले साल के मुकाबले दिसंबर में सकल (ग्रोस) जीएसटी संग्रह में छह फीसदी की कमी आई है। प्रशासन दिसंबर में 158 करोड़ का ही जीएसटी संग्रह कर पाया है।
दिसंबर में जीएसटी संग्रह का घटना चिंता का विषय है क्योंकि बीते कई महीनों से केंद्र सरकार और प्रशासन ने लॉकडाउन में बड़े पैमाने पर रियायतें दी गई हैं। नवंबर से लॉकडाउन के सभी नियमों को लगभग खत्म कर दिया गया है। दिसंबर 2019 में जीएसटी का संग्रह करीब 168 करोड़ रुपये था जबकि इस बार 158 करोड़ ही आया है।
नवंबर में 141 करोड़ का जीएसटी संग्रह हुआ था। अप्रैल में प्रशासन को सिर्फ 14 करोड़, मई महीने में 42 करोड़, जून में 73 करोड़, जुलाई में 109 करोड़, अगस्त में 139 करोड़, सितंबर में 141 करोड़ और अक्तूबर में 152 करोड़ का जीएसटी संग्रह हुआ था। अप्रैल और मई में सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां बंद रहीं, जिसकी वजह से टैक्स कलेक्शन में भारी कमी आई। गौरतलब है कि जीएसटी पेट्रोल और शराब को छोड़कर अन्य पर वसूला जाता है।
पिछले साल के मुकाबले हर महीने जीएसटी में गिरावट
शहर में लॉकडाउन के बाद से अब तक जीएसटी संग्रह में पिछले साल के मुकाबले हर महीने गिरावट देखी जा रही है। माल और सेवा कर (जीएसटी), आबकारी और वैट चंडीगढ़ प्रशासन के खजाने को भरने में अहम भूमिका अदा करते हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से बड़ा असर भी इन्हीं पर पड़ा है।
बता दें कि अप्रैल और मई में लगे संपूर्ण लॉकडाउन की वजह से चंडीगढ़ प्रशासन को टैक्स कलेक्शन में 342 करोड़ का घाटा हुआ था। हालांकि अभी पूरी तरह से अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है। वहीं, पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा ने जीएसटी के संग्रह में पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी दर्ज की है।
जीएसटी संग्रह
- अगस्त 139 करोड़
- सितंबर 141 करोड़
- अक्टूबर 152 करोड़
- नवंबर 141 करोड़
- दिसंबर 158 करोड़