सबसे बेहतर पाने की इच्छा युवाओं को तनाव का शिकार बना रहा है। फिर वह बेहतरी चाहे कॅरिअर में हो या जीवनसाथी की तलाश में। मौजूदा समय में अच्छे जीवनसाथी की तलाश में एक्सपेरिमेंटल सोच युवाओं को डिप्रेशन का शिकार बना रही है।
कॅरिअर में सफलता प्राप्त कर चुकीं लड़कियां इस तरह की समस्या से ज्यादा प्रभावित हैं। इसमें 30 से 35 साल के बीच की कामकाजी लड़कियां बेहतर जीवन साथी की तलाश में एक्सपेरिमेंटल होती जा रही है। उन्हें यह बात स्वीकार नहीं है कि उनका जीवन साथी किसी मायने में भी उनसे कम हो। यह कहना है पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग की पूर्व प्रोफेसर आदर्श कोहली का। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में युवा अपने जीवनसाथी को चुनने से पहले उनके साथ समय गुजारना चाहता है। इस स्थिति में वह उनके साथ इतना इंवॉल्व हो जा रहा है कि ब्रेकअप की स्थिति उत्पन्न होने पर वह डिप्रेशन की स्थिति में चले जा रहे हैं। इस तरह की समस्या चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ रही है।
शादी जैसे मामलों में ऑनलाइन माध्यमों से वर वधु की तलाश ऐसे तनाव को बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है। यह कहना है पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. राहुल चौधरी का। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन माध्यम से जीवनसाथी चुनने वाले युवा चंद दिनों में एक दूसरे को समझने का प्रयास करते हैं लेकिन उस दौरान कई ऐसी बातें पता नहीं चलती जो समय के साथ सामने आती हैं। ऐसे में जरूरी है कि वे शादी से पहले किसी भी तरह कि नकारात्मक जानकारी सामने आने पर बिना खुद को दोषी ठहराए उचित निर्णय लें क्योंकि यह बात समझना बेहद जरूरी है कि शादी के बाद कानूनी पचड़े में फंस कर पूरे जीवन को तनावग्रस्त बनाने से बेहतर पहले उचित निर्णय लेना है। डॉ. राहुल ने बताया कि ऐसे मामलों में काउंसलिंग की सहायता से तनाव प्रबंधन करना आसान है इसलिए ऐसी समस्या को खुद तक सीमित रखने की बजाय विशेषज्ञ की राय ले।
पंजाबी यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर विनोद चौधरी का कहना है कि इस तरह की समस्या का सबसे बड़ा कारण वर्तमान की बजाय भूत और भविष्य में जीने की आदत है। ऐसे मामलों में कई बार युवा सामने वाले की मौजूदा स्थिति पर भरोसा करने की बजाय उससे जुड़ी भूतकाल की किसी बात को ज्यादा महत्व देने लगते हैं। जिससे इस तरह की स्थिति उत्पन्न होती है। मेरा मानना है कि अगर कोई पहले अनजाने में कोई गलती कर बैठा हो तो उसके लिए उसे पूरी जिंदगी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस तरह की घटनाओं से बढ़ते तनाव पर रोक के लिए सबसे पहले कम्युनिकेशन विदाउट जजमेंट के प्रक्रिया को फॉलो करना होगा। भविष्य की योजनाओं को वर्तमान के आधार पर बनाया जाना चाहिए। वहीं इस तरह की सबसे ज्यादा समस्या अनमेच्योर युवाओं के मामले में सामने आता है। ऐसे में किसी से भी भावनात्मक रूप से जाने से पहले अपनी उम्मीदों और अपेक्षाओं का आकलन कर लें।