एक साल पहले रैन बसेरा खाली कराना था, अब तक नहीं हुआ
लगभग 25 साल पहले निगम ने सेक्टर-28 व 29 का रैन बसेरा आईटीबीपी व सीआरपीएफ को कुछ समय के लिए दिया था। अधिकारियों की गलती के कारण बाद में इसके बारे में किसी ने कुछ पूछा ही नहीं। अब यह बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। स्थानीय बटालियन के प्रभारियों से प्रशासन ने बात की तो उनका कहना है कि अगर वह लोग इसे खाली कर देंगे तो उनके जवान कहां रहेंगे। रैन बसेरा निगरानी कमेटी ने प्रशासन के तत्कालीन मुख्य अभियंता मुकेशानंद को पिछले साल दोनों रैन बसेरा खाली कराने को कहा था, लेकिन इस पर अब तक कोई काम नहीं हुआ।
उच्च न्यायालय व न्यायाधीश की सुरक्षा में तैनात हैं जवान
सीआरपीएफ व आईटीबीपी के जवान शहर में उच्च न्यायालय व न्यायाधीश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्र में भी इन जवानों की तैनाती है। हालांकि दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर दोनों बटालियन का मुख्यालय है। प्रशासन ने जब केंद्रीय मंत्रालय को पत्र लिखकर जवानों को अन्य जगह स्थानांतरित करने को कहा है, ताकि बिल्डिंग की मरम्मत कराई जा सके।
निगम को सेक्टर-43 में नए रैन बसेरे के लिए मिली भूमि
प्रशासन ने सेक्टर-43 में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से एक रैन बसेरा बनवाने के लिए निगम को भूमि आवंटित कर दी है। मुख्य वास्तुकार की निगरानी में रैन बसेरे का नक्शा तैयार कराया जा रहा है। इस रैन बसेरे में 100 से ज्यादा लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। जिसमें महिला, पुरुष व दिव्यांगों के लिए रहने व शौचालय की अलग-अलग व्यवस्था होगी। यह रैन बसेरा एकदम आधुनिक होगा।
उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित की गई रैन बसेरा निगरानी कमेटी की बैठक में इस मुद्दे को रखा था। प्रशासन के मुख्य अभियंता को रैन बसेरा खाली कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। कोरोना महामारी के कारण इस पर कोई कार्य नहीं हो सका है। केंद्र से बात चल रही है। जल्द रैन बसेरा निगम के कब्जे में आ जाएगा। - केके यादव, आयुक्त, नगर निगम