कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व शहर के पूर्व मेयर सुभाष चावला ने बुधवार को पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। चावला बीते 48 वर्ष से कांग्रेस में थे।
चावला ने कहा कि जिस आम आदमी पार्टी की वजह से कांग्रेस की यह हालत हुई, अब कांग्रेस ने उसी पार्टी से हाथ मिला लिया। यह उनके लिए बर्दाश्त से बाहर था। हर राजनीतिक दल के नीतिगत नियम होते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चंडीगढ़ कांग्रेस को यह फैसला काफी महंगा साबित होगा। चावला ने कहा कि पैसा कांग्रेस खर्च कर रही है और लीडरशिप आम आदमी पार्टी की तैयार हो रही है। यह अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। कहा कि चंडीगढ़ में जैसा उम्मीदवार चाहिए था, वैसा कांग्रेस देने में पिछड़ गई। वह संजय टंडन के सेवा कार्यों से काफी प्रभावित हैं, क्योंकि कोविड के दौरान उन्होंने जनता की जो सेवा की थी वह बेमिसाल है।
नगर निगम के बड़े जानकार, लंबा सियासी अनुभव
चावला को कई दशकों का राजनीतिक अनुभव है। इसका कांग्रेस को लाभ मिलता था। वह पार्टी के सभी पदों पर रहे हैं, इसलिए उनके पास हर स्तर का प्रशासनिक अनुभव भी था। दो बार शहर का मेयर रहने की वजह से वह नगर निगम के नियमों के सबसे बड़े जानकार के रूप में जाने जाते हैं। यह बात उनकी ज्वाइनिंग पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने भी कही। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं भाजपा के कई पार्षद भी उनसे निगम के नियमों पर समय-समय पर सलाह लेते हैं। अच्छे वक्ता के साथ गांव-कॉलोनियों के लोगों में भी उनकी पहचान है।
इस घटना पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी ने सुभाष चावला को बहुत कुछ दिया। अफसोस है कि वह इस लड़ाई को बीच में छोड़ गए और भाजपा के आगे घुटने टेक दिए। पार्टी ने उन्हें काफी मान-सम्मान दिया। उन्हें हर पद से नवाजा लेकिन दुख होता है कि पूरी जिंदगी पार्टी में रहने के बाद अब पार्टी के नुकसान पहुंचाने का काम किया है। हालांकि उनके जाने से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। शहर का एक-एक मतदाता जागरूक है और गठबंधन के प्रत्याशी के हक में वोट डालने को आतुर है।