सिटी के व्यापारी इस बार लोकसभा चुनावों का बहिष्कार कर सकते हैं। इसका कारण है व्यापारियों की लंबित मांगें। यह वह मांग हैं जो कि पिछले पांच साल से मानी नहीं गई हैं।
सिटी के व्यापारियों का कहना है कि सरकार बदली और नेता भी बदले, लेकिन मांगों की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। चंडीगढ़ में करीब पांच हजार से ज्यादा व्यापारी हैं। जो अपनी मांगों की पुरजोर वकालत कर रहे हैं।
चंडीगढ़ के व्यापारी और ड्यूसन के मालिक दिवाकर सहूंजा ने कहा कि पेनल्टी और बिल्डिंग बायलाज जैसे मुद्दों की ओर ध्यान ही नहीं जाता। प्रशासन पांच सौ रुपये प्रति स्क्वायर फीट पेनल्टी लगा रहा है।
सेक्टर-17 के एक व्यापारी पर चौबीस करोड़ रुपये की पेनल्टी लगा दी गई है जबकि इंडस्ट्रियल एरिया के व्यापारियों पर सात करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई है। समझ में यह नहीं आता है कि प्रशासन व्यापारियों से क्या चाहता है। इस मामले को नेताओं के पास भी ले गए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। अब जब तक मांगों को मानने का आश्वासन नहीं दिया जाता है तब तक कैसे किसी पर विश्वास करें।
चंडीगढ़ के व्यापारी सतपाल गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों के लिए काम करने वाला नेता चाहिए। अब आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि चाहे ग्रेन मार्केट हो या फिर सिटी की मार्केट एसोसिएशन या फिर इंडस्ट्रियल एरिया, सभी जगह परेशानी हैं।
लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों को जगदीश कपूर ने कहा कि व्यापारियों के लिए व्यापारी अब व्यापार नहीं कर रहे हैं बल्कि पिस रहे हैं। वैट, पेनल्टी जैसे मुद्दों की कोई सुनवाई नहीं हो रही। पंजाब का हर कानून चंडीगढ़ में लागू किया जाता है, लेकिन जब वैट और अन्य बात होती हैं तो सब दूरी बना लेते हैं।
चंडीगढ़ के व्यापारी वरिंदर गुलेरिया ने कहा कि लोकसभा चुनाव महत्वपूर्ण हैं, लेकिन व्यापारियों की मांगे भी महत्वपूर्ण हैं। एक ओर बिजनेस में तेजी नहीं है और दूसरी ओर केंद्र और सरकार द्वारा टैक्स पर टैक्स थोपे जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में व्यापारी राहत चाहते हैं। चुनाव के मैनिफेस्टो में तो जो भी नेता होता है वह सबको साथ में लेता है पर बाद में सब हवा हवाई हो जाता है। इस बार व्यापारी इस झांसे में नहीं आएंगे।