यूटी प्रशासक प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी ने प्राइवेट स्कूलों की फीस पर लगाम कसने के लिए यूटी प्रशासन द्वारा तैयार नई फीस पॉलिसी के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार शाम को इस संबंध में यूटी के शिक्षा सचिव को निर्देश जारी कर दिए गए। शिक्षा विभाग ने भी देर शाम ड्रॉफ्ट पालिसी को अभिभावकों और आम पब्लिक के फीडबैक के लिए अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया है। शहरवासी डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन की ईमेल dpi-chd@nic.in पर अपने सुझाव भेज सकते हैं।
यूटी प्रशासक की ओर से मंजूर की गई नई फीस पॉलिसी को अमर उजाला ने 5 मई के अंक में ‘प्राइवेट स्कूलों की फीस पर लगाम लगाने की तैयारी’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग अब पॉलिसी पर आम जनता की राय लेकर जरूरत पड़ने पर संशोधन कर अंतिम मंजूरी के लिए प्रशासक के पास इसी महीने भेज देगा। पॉलिसी में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 2013 में प्राइवेट स्कूलों की जांच के लिए जस्टिस आरएस मोंगिया कमेटी का भी जिक्र किया गया है। कमेटी को 6 महीने में रिपोर्ट देनी थी। लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।
नई पॉलिसी में प्राइवेट से प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई मुश्किल
यूटी प्रशासन द्वारा तैयार की गई नई फीस पॉलिसी से प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस, प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस में लगवाने और महंगी ड्रेस कैंपस में ही बेचने जैसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करने में मुश्किल आ सकती है। पॉलिसी के नियमों की अनदेखी करने पर स्कूलों के खिलाफ सीबीएसई को मान्यता रद्द करने या एस्टेट ऑफिस को लैंड अलॉटमेंट रद्द करने या जुर्माना लगाने का प्रावधान यूटी प्रशासन ने किया है। तीनों ही मामलों में प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।
नई पॉलिसी की मुख्य बातें इस प्रकार हैं ..
-शिक्षा विभाग एक कमेटी गठित करेगा जो कि नई फीस पॉलिसी के संबंध में प्राइवेट स्कूलों पर नजर रखेगा।
-प्राइवेट स्कूल एडमिशन फीस, री एडमिशन फीस, स्कूल कैपंस में किताबों या ड्रेस की सेल नहीं कर पाएंगे।
-प्राइवेट स्कूल ऐसी किताबें नहीं लगाएंगे जो सिर्फ चुनिंदा बुक शॉप पर उपलब्ध होंगी।
-स्टूडेंट्स को किताबें रिटेल प्राइस पर मिलने वाले डिस्काउंट रेट पर मिलनी चाहिए।
-प्राइवेट स्कूलों की फीस दो कैटेगरी पहली से पांचवी और छठी से 12वीं क्लास की होगी।