पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को 14.82 एकड़ भूमि की अलॉटमेंट के आदेश के बाद यूटी प्रशासन ने इस मामले में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट को 100 करोड़ से अधिक का बताया है। इसके साथ शहर में भूमि के अत्यधिक दाम होने के चलते केंद्र का दखल जरूरी बताया है।
हाईकोर्ट में यूटी प्रशासन के इस पत्र को पेश किया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अगले सप्ताह तक पक्ष रखने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे संस्थान भी मौजूद हैं, जहां अत्यधिक भूमि दी गई थी और आज ताले लगे हुए हैं। हाईकोर्ट में रोजाना 10 हजार लोग आते हैं तो यहां के लिए भूमि देने पर आनाकानी क्यों की जा रही है।
पिछली सुनवाई पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी और न्यायमूर्ति निधि गुप्ता की खंडपीठ ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी संघ के सचिव विनोद धत्तरवाल और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए भूमि अलॉटमेंट को बेहद जरूरी बताया।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने कहा था कि हाईकोर्ट की मौजूदा इमारत/परिसर भार सहन करने में सक्षम नहीं है, क्योंकि हाईकोर्ट में लंबित पांच लाख से अधिक न्यायिक फाइलों को रखने के लिए मुश्किल से ही कोई जगह है। हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया था कि 14.89 एकड़ भूमि की अलॉटमेंट का लेटर 24 जनवरी को हाईकोर्ट में पेश किया जाए।
बुधवार को सुनवाई शुरू हुई तो प्रशासन ने बताया कि यह प्रोजेक्ट 100 करोड़ से अधिक का है। ऐसे में प्रशासन ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है। हाईकोर्ट में पत्र पेश किया गया तो पाया गया कि प्रशासन ने लिखा है कि उनके लिहाज से हाईकोर्ट को केवल 8.5 एकड़ भूमि की जरूरत है लेकिन 14.89 एकड़ भूमि अलॉट करने का आदेश दिया गया है और इसके लिए कोई जस्टिफिकेशन नहीं है।