कुछ नया स्टॉक आने और जांच के बाद मिले अच्छे गेहूं के स्टॉक में से अनाज बांटने का कार्य बुधवार से शुरू हो रहा है। रामदरबार, मनीमाजरा और मौलीजागरां के केंद्रों पर गेहूं बांटा जाएगा। खाद्य विभाग ने अपने कर्मचारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। पिछले पांच दिन से गेहूं बांटने का काम बंद है। सलाहकार के आदेश के अनुसार, अगर किसी का गेहूं खराब है तो इन केंद्रों पर जाकर गेहूं बदलवा सकता है। दरअसल, कोरोना के बाद से केंद्र सरकार ने सूखा राशन देने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत शहर के करीब 62 हजार परिवारों को प्रति सदस्य 25 किलो गेहूं दिया जा रहा है। यूटी प्रशासन के खाद्य विभाग के पास कोई भी सरकारी राशन की दुकान नहीं है, इसलिए विभाग ने एजेंसी की नियुक्ति की है, जो शहर के विभिन्न सरकारी स्कूल, कम्यूनिटी सेंटर, ग्राउंड व अन्य जगहों पर जाकर अनाज वितरण का कार्य करती है।
सेहत का सवाल, गेहूं बदले प्रशासन
सड़े और कंकड़ वाले गेहूं को देकर प्रशासन ने गरीबों का मजाक उड़ाया है। इसे वापस किया जाना चाहिए, क्योंकि ये प्रशासन की गलती की वजह से लोगों तक पहुंचा है। इसे खाने से लोगों का स्वास्थ्य खराब हो सकता है। प्रशासन को अच्छा गेहूं देना चाहिए।
- कृपा सिंधू यादव, समाजसेवी
अच्छी गुणवत्ता वाला गेहूं बांटा जाए
लोग दिहाड़ी तोड़कर लाइन में लगे और फिर उन्हें सड़ा हुआ गेहूं दे दिया गया। अब प्रशासन व खाद्य विभाग की जिम्मेदारी है कि इस गेहूं को बदलें। गरीब लोगों को अच्छी गुणवत्ता वाला गेहूं मिलना चाहिए, ये उनका अधिकार है। प्रशासन शिविर लगाकर इन गेहूं को बदले।
- क्रांति शुक्ला, फाउंडर, समस्या समाधान टीम
दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर हो कार्रवाई
शहर में कुछ जगह सड़ा हुआ गेहूं बांटा गया। गरीबों के हितों की रक्षा करने वाले लोग ही जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस कृत्य में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिनकी वजह से पूरे चंडीगढ़ व प्रशासन की छवि खराब हुई है।
- विनीत तिवारी, मनीमाजरा निवासी
एफसीआई नॉर्थ जोन (नोएडा) की टीम भी मामले की जांच कर रही है। इसके अलावा मैंने खाद्य विभाग के सचिव विनोद पी कावले को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि जिन लोगों के घर तक खराब गेहूं पहुंचा है, उनसे गेहूं वापस लिया जाए। चंडीगढ़ जैसे शहर में इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए थी। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक