सेफ ट्रांसपोर्टेशन पॉलिसी चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से नोटिफाई कर दी गई है। इसमें स्कूलों, एसटीए और ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी तय की गई है।
पॉलिसी में स्कूल बसों की गुणवत्ता को सही करने पर ध्यान देने की बात कही गई है। इसमें बस ऑपरेटर को 30 दिन का रिकार्ड रखने को निर्देश दिया गया कि स्कूल बस किस रूट से जाती है, इसकी जानकारी दी जाए।
वहीं, स्कूल मैनेजमेंट अपने एक फैकल्टी या स्टॉफ मेंबर को ट्रांसपोर्ट मैनेजर के तौर पर अप्वाइंट करेगी। इसकी जानकारी एसटीए को देनी होगी। सभी स्कूली बसों में प्राथमिक उपचार के लिए बॉक्स रखना जरूरी है।
इसमें फायर सेफ्टी उपकरण रखे जाने चाहिए। स्कूल लेवल पर ट्रांसपोर्ट कमेटी बनेगी। इसके हेड प्रिंसिपल या हेडमास्टर होंगे। कमेटी की महीने में एक मीटिंग जरूर होगी ।
बसों मे हो चेकिंग
बुधवार को हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि स्कूल बसों में स्टूडेंट्स की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए। कमीशन फार प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की चेयरपर्सन देवी सिरोही से बसों में बच्चों की सुरक्षा केसुझाव मांगे हैं।
वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से हलफनामा दायर कर बताया गया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए ट्रांस जेंडर की तैनाती भी की जाएगी। इसके साथ ही स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किया जाएगा।
बच्चों की सुरक्षा के लिए यह पॉलिसी प्रशासन की ओर से नोटिफाई की गई है।
- राजीव तिवारी, एडीशनल सेक्रेटरी एसटीए
स्कूल बसों का स्टैंडर्ड
- बस गोल्डन पीले रंग की होनी चाहिए जिससे कि सफेद रंग की रिफ्लेक्टिव टेप लगनी चाहिए।
- टैंपर प्रूफ स्पीड गवर्नर लगे हों, अधिकतम स्पीड लिमिट 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक न हो।
- बस का फिटनेस और इंश्योरेंस सर्टिफिकेट हो।
- मोटर व्हीकल एक्ट- 1988 के नियमानुसार बसें चलनी चाहिए।
- बसों की विंडो में ग्रिल लगी होनी चाहिए, बस के भीतर कोई पर्दा नहीं होना चाहिए।
एसटीए और ट्रैफिक पुलिस
- निरंतर अंतराल में स्कूल बस और आटो की चेकिंग
- एसटीए स्कूल बस, आटो, कैब्स, ड्राइवर, अटेंडेंट्स और चिल्ड्रेन बस के बारे में जानकारी रखें।
आटो रिक्शा और मैक्सी कैब
- एसटीए से मान्यता प्राप्त आटो में पांच से अधिक बच्चे न बैठे हों।
- ऑटो के दोनों ओर ग्रिल्स लगी होनी चाहिए।
- एसटीए से पास मैक्सी कैब में निर्धारित क्षमता में बच्चे बैठे हों।
- ट्रैफिक पुलिस ड्राइवर के टेस्ट केसाथ- साथ ओवरलोडिंग पर नजर रखें।