चंडीगढ़ प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी नई पॉलिसी नोटिफाई कर दी है। इसके तहत किसानों को काफी राहत मिलेगी और सही दाम भी मिलेंगे। पॉलिसी के तहत अब किसानों की मर्जी के बिना उनकी जमीन अधिग्रहण नहीं की जा सकेगी। जमीन अधिग्रहण से पहले प्रशासन को नोटिफाई की गई पॉलिसी के मुताबिक किसानों से कंसेंट लेने से लेकर मोलभाव तक करना होगा ताकि किसानों की जमीन के अधिग्रहण के समय उन्हें नोटिफाई की गई पॉलिसी के मुताबिक उचित रेट दिया जा सके।
प्रशासन ने लैंड एक्वीजिशन नेगोशिएशन पॉलिसी को मंजूरी देकर नोटिफाई कर दिया है। इस पॉलिसी के मुताबिक अगर किसानों की अधिग्रहित की गई जमीन को लेकर समय पर पूरा मुआवजा नहीं दिया जाता है तो प्रशासन एक तय किए गए रेट पर जमीन अधिग्रहित कर सकेगा। पॉलिसी के मुताबिक डिस्ट्रिक्ट प्राइस फिक्सेशन कमेटी जमीन के रेट तय करेगी। इस कमेटी में जिला उपायुक्त, सांसद, चीफ आर्किटेक्ट, भू अधिग्रहण अधिकारी, स्थानीय पार्षद व स्थानीय सरंपच शामिल होंगे।
पॉलिसी में यह तय किया गया है कि अगर जमीन अधिग्रहण करने के बाद प्रशासन 6 महीने तक मुआवजा नहीं देता है तो उसके बाद मुआवजा राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज देना होगा। पॉलिसी के मुताबिक जो भी विभाग शहर में जमीन अधिग्रहण करना चाहेगा, उसे पहले भू अधिग्रहण अधिकारी को एक प्रस्ताव भेजना होगा। साथ ही जमाबंदी के दस्तावेज भी जमा कराने होंगे। भू-अधिग्रहण अधिकारी भेजे गए प्रस्ताव की पूरी पड़ताल करने के बाद मंजूरी के लिए प्रशासक को भेजेंगे।
इसके बाद ही जमीन अधिग्रहण करने को लेकर मंजूरी दी जाएगी। अधिग्रहण से पहले जमीन मालिक से कंसेंट लिया जाएगा, उस कंसेंट में रेट और सारी शर्तें शामिल होंगी। अगर जमीन मालिक और प्रशासन के बीच रेट को लेकर समझौता नहीं होता है तो यह मामला कमेटी के पास जाएगा जो इस पर फैसला करेगी। आखिरी फैसला प्रशासक के स्तर पर ही होगा। डिस्ट्रिक्ट प्राइस फिक्सेशन कमेटी जो प्राइस फिक्स किया होगा, उस हिसाब से 10 परसेंट तक प्रीमियम की मंजूरी दे सकती है। हालांकि इसके बाद भी फाइनेंस डिपार्टमेंट की अप्रूवल पैसों के लिए जरूरी होगी।