चंडीगढ़ प्रशासन में 12 आईएएस और करीब इतने ही एचसीएस और पीसीएस अफसर हैं। प्रतिनियुक्ति पर आने वाला हर वरिष्ठ अधिकारी अपने अनुसार नए सिरे से योजनाएं और नीतियां बनाता है। यही वजह है, कि जो नीतियां पहले लागू हुई हैं, उनका क्या हुआ, उस पर ध्यान न देते हुए नई नई नीतियों पर काम होता है।
शहर में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन वर्ष 2015 में औद्योगिक नीति (इंडस्ट्रियल पॉलिसी) लेकर आया। हालांकि इसे मंजूरी फरवरी 2019 में दी गई लेकिन आज तक यह पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई। उद्योगपति लगातार मांग भी कर रहे हैं। प्रशासन की बेरुखी से अधिकतर उद्योग पलायन कर चुके हैं। लीज होल्ड से फ्री होल्ड, ट्रांसफर फीस, टाइटल क्लियर नहीं होने समेत कई समस्याओं से शहर के उद्योगपति परेशान हैं। युवा प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट अप पॉलिसी बन रही थी, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों ने इसमें भी कोई खास रुचि नहीं दिखाई।
सेक्टर-32 के एक पीजी में आग लगने के बाद प्रशासन ने पीजी पॉलिसी बनाई, लेकिन उसके नियमों के तहत भी अब जांच नहीं होती। आवासीय इलाकों में नर्सिंग होम खोलने के लिए भी प्रशासन नीति बना रहा है। प्रशासन में कुछ अधिकारियों का मानना है कि आवासीय इलाकों में नर्सिंग होम खुलेंगे तो वहां रहने वाले लोगों को समस्या होगी। पार्किंग की भी समस्या खड़ी होगी। बावजूद इसके पॉलिसी बनाई जा रही है।
पार्किंग पॉलिसी की अधिसूचना जारी कर भूला प्रशासन
चंडीगढ़ में बढ़ रहे वाहनों के दबाव को कम करने के लिए प्रशासन ने सात दिसंबर 2020 को पार्किंग पॉलिसी की अधिसूचना जारी कर दी। कई तरह के बदलावों का दावा किया गया। 11 महीने होने वाले हैं और आज तक पॉलिसी के किसी भी बिंदु पर गंभीरता से काम नहीं हुआ है। स्थिति जस की तस है। प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के दबाव के चलते पॉलिसी को लागू कर दिया लेकिन इसमें जो बातें कही गई थीं, उनमें से किसी पर काम नहीं किया। आलम ये है कि पार्किंग पॉलिसी होने के बावजूद सड़कों पर कोई असर दिखाई नहीं देता।
कई वर्षों से बन रही इलेक्ट्रिक वाहन नीति
शहर में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए यूटी प्रशासन पिछले कई सालों से इलेक्ट्रिक वाहन नीति बना रहा है लेकिन अब तक नीति तय नहीं हुई है। करीब ढाई साल पहले बनाए गए ईवी चार्जिंग स्पॉट भी अब खराब होने लगे हैं। अभी तक प्रशासन के अधिकारी इलेक्ट्रिक वाहन के इस्तेमाल पर इंसेंटिव देने व चार्जिंग स्टेशन की लोकेशन पर ही चर्चा कर रहे हैं। एक कमेटी बनाई गई है, जिसका मुख्य कार्य ईवी खरीदने पर पंजीकरण शुल्क, रोड टैक्स, पार्किंग फीस में रियायत, इंसेंटिव देने आदि पर फैसला लेना है। ये कमेटी नीति का मसौदा तैयार करेगी, जिस पर लोगों के सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।
मकान बनाने में निकले मलबे का क्या होगा, आज तक नीति नहीं
मकान बनाने के दौरान निकले मलबे का क्या होगा, इस पर अब तक प्रशासन की नीति स्पष्ट नहीं है। सलाहकार धर्मपाल ने इस मामले में गंभीरता दिखाई और जल्द कंस्ट्रक्शन व डिमोलिशन वेस्ट मैनेजमेंट नीति 2021 का प्रारूप तैयार करने के आदेश दिए। सलाहकार ने इस संबंध में दो बार बैठक की है, लेकिन अभी तक प्रारूप पर काम चल रहा है। इस नीति को लाने का मकसद है कि मकान तोड़ने के बाद जो भी अपशिष्ट सामग्री बचती है, उसका 100 फीसदी निपटारा किया जाएगा। सामग्री को इधर उधर फेंकने के बजाय उसे रिसाइकल कर अन्य चीजों का निर्माण किया जाएगा। यह नीति आम नागरिकों, निजी ठेकेदार और सरकारी विभागों के लिए एक समान होगी।