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चंडीगढ़ में बढ़ेगी पेंशन: प्रशासन ने पहले केंद्र को भेजा था प्रस्ताव, अब बजट देखकर खुद लेगा फैसला

Tue, 18 Jul 2023 08:41 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

वृद्धावस्था पेंशन भारत के संविधान की 7वीं अनुसूची की समवर्ती सूची में शामिल है। सभी राज्य खुद पेंशन की राशि को बढ़ाते आए हैं। पहले चंडीगढ़ प्रशासन भी यही करता था, लेकिन वर्ष 2016 में मंत्रालय के एक सवाल से चीजें बदल गईं।
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पेंशन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वृद्ध, दिव्यांग और विधवाओं को उत्तर भारत में सबसे कम पेंशन चंडीगढ़ में मिलती है। फरवरी 2016 के बाद से अब तक पेंशन में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि महंगाई आसमान पर पहुंच गई है। इसका जिम्मेदार खुद यूटी प्रशासन है, क्योंकि वर्ष 2016 में प्रशासन ने खुद पेंशन को 500 से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया था, लेकिन जब वर्ष 2018-19 में पेंशन को 1000 से बढ़ाकर 2000 करने की बात आई तो अफसरों ने प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रालय भेज दिया और वहां फाइल लटक गई। अब अधिकारियों को समझ आया है कि पेंशन तो खुद ही बढ़ानी थी। उधर, पेंशनभोगियों का कहना है कि शुक्र है, अफसरों को यह बात समझ आ गई कि पेंशन उन्हें खुद बढ़ानी है, ऐसे में अब पेंशन राशि बढ़ने की उम्मीद जगी है।
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प्रशासक की सलाहकार परिषद की समाज कल्याण समिति कई बार पेंशन बढ़ाने के लिए लिख चुकी है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बीते दिनों प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल की अध्यक्षता में समाज कल्याण विभाग की बैठक हुई। इसमें भी पेंशन का मुद्दा उठा। चर्चा हुई कि पेंशन राज्य का मुद्दा है या केंद्र का। कुछ अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी तौर पर पेंशन राज्य का मुद्दा है। वर्ष 2016 में प्रशासन ने खुद ही पेंशन राशि बढ़ाई थी, लेकिन 2018-19 में प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया। चर्चा के बाद फैसला हुआ कि मामला प्रशासन के वित्त विभाग को भेजा जाएगा ताकि वह आकलन कर सके कि प्रशासन खुद पेंशन राशि बढ़ाता है तो बजट पर कितना असर पड़ेगा।

सूत्रों के अनुसार, यह भी तय हुआ कि अगर बजट पर ज्यादा असर नहीं पड़ा तो प्रशासन खुद पेंशन बढ़ाएगा और बढ़ी हुई राशि को बजट में मांगा जाएगा। वित्त विभाग से जल्द यह जानकारी मांगी है ताकि पेंशन बढ़ाकर संशोधित एस्टीमेट में ही समायोजित कर दिया जाए।
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केंद्रीय मंत्रालय के सवाल से बदली व्यवस्था
वृद्धावस्था पेंशन भारत के संविधान की 7वीं अनुसूची की समवर्ती सूची में शामिल है। सभी राज्य खुद पेंशन की राशि को बढ़ाते आए हैं। पहले चंडीगढ़ प्रशासन भी यही करता था, लेकिन वर्ष 2016 में मंत्रालय के एक सवाल से चीजें बदल गईं। वर्ष 2016 में यूटी प्रशासन ने जब पेंशन को 500 से 1000 रुपये किया था और बजट को मंजूरी के लिए भेजा तो केंद्र ने सवाल पूछ लिया कि पेंशन की राशि को बढ़ाने से पहले उनसे मंजूरी क्यों नहीं ली गई। इसके बाद वर्ष 2018-19 में पेंशन बढ़ाने के फैसले की मंजूरी के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजना पड़ा। मंत्रालय ने दो बार चंडीगढ़ से अलग-अलग स्पष्टीकरण भी मांगे, लेकिन न तो प्रस्ताव को मंजूर किया और न ही चंडीगढ़ खुद फैसला लेने को कहा। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल दिल्ली भी गए थे और इस मामले पर गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात भी की थी।

तब से हरियाणा सात बार बढ़ा चुका
चंडीगढ़ में फरवरी 2016 के बाद से पेंशन नहीं बढ़ी जबकि इस बीच पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत लगभग सभी राज्य कई बार पेंशन की राशि को बढ़ा चुके हैं।

हरियाणा ने तो पिछले सात साल में सात बार पेंशन बढ़ाई है। 2016 में हरियाणा में पेंशन करीब 1400 रुपये थी, जो अब 2750 रुपये है। अन्य राज्यों में भी तीन से चार बार पेंशन की राशि बढ़ चुकी है।

शहर में पेंशन की स्थिति 
पेंशन वर्ग            संख्या             राशि (रुपये)

दिव्यांग             4650             1000 (0-69 फीसदी) और 2000 (70 फीसदी से ज्यादा)
विधवा             8592             1000 रुपये
वृद्धावस्था       12,192            1000 रुपये

पड़ोसी राज्यों में पेंशन
राज्य/यूटी - पेंशन राशि - पेंशन धारक

चंडीगढ़ - 1000 रुपये - 25.43 हजार
हरियाणा - 2750 रुपये - 17.85 लाख
पंजाब - 1500 रुपये - 29.29 लाख
हिमाचल प्रदेश - 1500 रुपये - 7.15 लाख
दिल्ली - 2000 रुपये - 4.5 लाख


पेंशन की राशि को बढ़ाने का मामला पिछले काफी समय से लंबित है। हम देख रहे हैं कि केंद्र की राशि के साथ क्या हम अपनी तरफ से रुपये जोड़कर पेंशन की राशि को बढ़ा सकते हैं या नहीं। मैंने विभाग को इस बारे में मामले की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक
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