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फैसला: चंडीगढ़ प्रशासन ने बदला सरकारी दफ्तरों का समय, सलाहकार के आदेश पर अब साढ़े नौ बजे से खुलेंगे ऑफिस

Sat, 19 Feb 2022 10:47 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रशासन के आदेशों के अनुसार अब शहर में सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे के बीच दफ्तर खुलेंगे, जबकि पहले सुबह 9.30 से शाम 5 बजे तक सभी सरकारी दफ्तर खुल रहे थे।
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चंडीगढ़ में सरकारी दफ्तरों का समय बदला। - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने शहर के सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव कर दिया है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल की ओर से इस संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी किए गए हैं। आदेश में लिखा गया है कि ये समय इसलिए बदला जा रहा है, ताकि एक समय पर छुट्टी होने पर शाम के समय लोगों को ट्रैफिक समस्या का सामना न करना पड़े। 

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प्रशासन के आदेशों के अनुसार अब शहर में सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे के बीच दफ्तर खुलेंगे, जबकि पहले सुबह 9.30 से शाम 5 बजे तक सभी सरकारी दफ्तर खुल रहे थे। कहा गया कि मोहाली, पंचकूला और केंद्र सरकार के दफ्तरों के लिए लोगों की छुट्टी एक समय पर होती है, जिसके चलते उन्हें ट्रैफिक समस्या का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि उन्होंने दफ्तरों के समय में बदलाव किया है। बता दें कि गुरुवार को वार रूम की बैठक में इस संबंध में फैसला लिया था, जिसके चलते ही शुक्रवार को ये आदेश जारी कर दिए गए।

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गरमी की आहट के साथ ही बदला बसों का एरिया

चंडीगढ़ के लोगों को अब एसी बसों में पिछले साल दिसंबर से पहले वाला ही किराया चुकाना होगा। सर्दियों के सीजन में एसी का इस्तेमाल नहीं होता है, जिसके चलते प्रशासन ने दिसंबर माह में एसी बसों का भी किराया नॉन एसी जितना ही कर दिया था। अब दोबारा से गर्मी का सीजन शुरू हो रहा है, जिसके चलते किराए में फिर से बढ़ोतरी कर दी गई है।

प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि सर्दी के चलते एसी बसों का किराया भी नॉन एसी बसों के जितना कर दिया जाता है। पिछले कुछ साल से इस संबंध में आदेश जारी किए जा रहे हैं। शहर में एसी बसों में पहले पांच किलोमीटर के 15 और उसके बाद किलोमीटर के हिसाब से 20 से 30 रुपये चुकाने पड़ते हैं, जबकि नॉन एसी बसों में पहले पांच किलोमीटर के 10 रुपये और उसके बाद किलोमीटर के हिसाब से 15 और 25 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं।

प्रशासन के अनुसार अब अगले आदेशों तक बसों में ही यही किराया लागू रहेगा। लॉकडाउन के दौरान सीटीयू को सवारियां न मिलने व सीमित संख्या में बसें चलाने के चलते घाटे का सामना भी करना पड़ा। यही कारण है कि विभाग ने अपने किराए में भी बढ़ोतरी कर दी थी और कुछ किलोमीटर और अधिक किलोमीटर के लिए भी एक जैसा ही किराया वसूला जा रहा था, जबकि बाद में यह किराया पहले जैसे ही कर दिया गया था। यहां तक कि इस दौरान शहर में कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए गए थे, जिसके चलते अधिकतर गतिविधियों पर रोक थी। इस कारण बसों के लिए सवारियां नहीं मिल रही थीं।
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