चंडीगढ़। नगर निगम को उम्मीद थी कि गांवों के विकास के लिए केंद्र सरकार से संशोधित अनुमान (आरई) में 203 करोड़ रुपये मिलेंगे लेकिन केंद्र ने एक भी रुपया नहीं दिया है। अब प्रशासन ने वर्ष 2022-23 के लिए वर्तमान वित्त वर्ष से 650 करोड़ रुपये अधिक मांगे हैं, ताकि रुकी हुई परियोजनाओं और गांवों के विकास को गति दी जा सके।
वित्त वर्ष 2021-22 के लिए चंडीगढ़ ने केंद्र से 5670 करोड़ रुपये मांगे थे। इसमें रेवेन्यू हेड के तहत पांच हजार करोड़ और कैपिटल हेड के तहत करीब 600 करोड़ रुपये मांगे गए थे, लेकिन 484 करोड़ की कटौती के बाद चंडीगढ़ को 5186 करोड़ रुपये ही मिले थे। इसमें नगर निगम में शामिल हुए गांवों के लिए कुछ खास नहीं था। ऐसे में निगम को उम्मीद थी कि संशोधित अनुमान (आरई) में उन्हें 203 करोड़ रुपये मिलेंगे। हालांकि केंद्र ने आरई में भी कुछ नहीं दिया। ऐसे में अब वित्त वर्ष 2022-23 के लिए प्रशासन ने 5836 करोड़ रुपये मांगे हैं, जो वर्तमान वित्तीय वर्ष में मिले 5186 से 650 करोड़ रुपये ज्यादा है।
अतिरिक्त पैसा नगर निगम में शामिल हुए गांव व प्रशासन की कुछ प्रमुख परियोजनाओं के लिए मांगा गया है। अब देखना यह है कि केंद्र से चंडीगढ़ को कितना पैसा मिलता है। वर्ष 2020-21 में कुल 5138 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें रेवेन्यू हेड के तहत 4643 और कैपिटल हेड में 494 करोड़ रुपये मिले थे।
संशोधित अनुमान में नगर निगम को लगा है झटका
आरई में केंद्र सरकार से 5389 करोड़ रुपयों की मांग की गई थी। केंद्र ने वर्तमान वित्त वर्ष के बजट खर्चे को देखा और फिर एक भी रुपये अतिरिक्त देने की बजाय 5186 करोड़ रुपये के सालाना बजट में से 244 करोड़ रुपये काट लिए। दरअसल, किसी वित्त वर्ष के बीच या अंत में उस वर्ष की बची हुई अवधि में सरकार को कितना राजस्व प्राप्त होगा और उसका खर्च कितना होगा, इसके अनुमानित राशि को संशोधित अनुमान कहा जाता है। यह वित्त वर्ष के फर्स्ट हाफ यानी पहली छमाही के ट्रेंड के आधार पर तय किया जाता है। इसी वजह से बजट अनुमान में जो लक्ष्य तय किया जाता है, संशोधित अनुमान में उसमें अंतर आ जाता है।