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मेवात में बिरयानी के सैंपल लेने के आदेश को चुनौती, सरकार से मांगा जवाब

Thu, 22 Sep 2016 11:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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mewat beef contriversy - फोटो : File Photo
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हरियाणा गो-सेवा आयोग की ओर से बकरीद पर मेवात में बिरयानी के सैंपल लिए जाने के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी गई है। वीरवार को जस्टिस एसएस सरों व जस्टिस लीजा गिल की डिवीजन बेंच ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई छह अक्तूबर को होगी।
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मेवात के एडवोकेट हसीन की ओर से एडवोकेट मोहम्मद अरशद के मार्फत दायर याचिका में कहा गया है कि इस मामले में आम लोगों से जिस तरह का व्यवहार किया गया है, उससे याची को लगता है कि वह भी एक पीड़ित है। इस पर डिवीजन बेंच ने सरकारी वकील से अगली तारीख पर जवाब फाइल करने के आदेश देते हुए कहा कि अदालत केवल यह जानना चाहती है कि क्या राज्य सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई की है। कहीं, इससे किसी तरह की अशांति तो नहीं पैदा हो रही। इसके साथ ही अदालत ने यह आदेश भी दिए कि प्रदेश सरकार प्रवेंशन आफ फूड एडल्टरेशन एक्ट 1954 के सेक्शन 15 के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच तो कर सकती है, लेकिन यह काम सक्षम अधिकारी फूड इंस्पेक्टर या मेडिकल प्रैक्टिशनर ही कर सकते हैं, गो-सेवा आयोग नहीं।
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मामले की अगली सुनवाई 6 अक्तूबर को

- फोटो : File Photo
बीते 24 अगस्त को हरियाणा गो सेवा आयोग ने मेवात और नूंह के बाजारों में कथित बीफ की बिक्री की जांच के लिए बिरयानी के सैंपल लेने के आदेश जारी किए थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि बाद में लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी आफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज, जिसे बिरयाणी के सैंपलों की जांच का कोई अधिकार भी नहीं है, ने सभी सात सैंपलों में बीफ पाए जाने की बात कही थी।

याचिकाकर्ता ने गो सेवा आयोग के आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका में कहा है कि इस कदम से समुदायों के बीच ध्रुवीकरण की शर्मनाक कोशिश और सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। याचिकाकर्ता के वकील मोहम्मद अरशद ने अदालत से कहा कि हरियाणा गो सेवा आयोग ने हाल ही में मेवात में सड़क किनारे बिरयानी बेचने वालों की रेहड़ियों से सैंपल एकत्र किए, जोकि संविधान के अंतर्गत अनुच्छेद 14, 19, 21 व 25 में निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
 
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