डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रशासन ने लोगों के सख्त फरमान जारी किया है। अगर किसी के यहां डेंगू का लारवा मिला तो खैर नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ अब चालान काटने की तैयारी में जुट गया है। शहर में इस साल की शुरुआत में ही एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 लागू हो चुका है।
इसके तहत डेंगू नोटिफाइड डिजीज बन गई है। इस एक्ट के मुताबिक यदि नोटिस देने के बावजूद घरों से या फिर सरकारी संस्थानों से लारवा मिलता है तो उसके खिलाफ चालान दिया जाएगा। चालान के तहत जुर्माना और सजा का प्रावधान भी है।
डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पिछले दो महीने से तैयारी में जुटा था। उसकी 50 टीमे रेगुलर फील्ड में लारवा चेक कर रही हैं। सर्वे के दौरान इशारा हो गया था कि इस साल डेंगू के मामले बढ़ेंगे। हर रोज 100 जगहों से ज्यादा लारवा मिल रहे थे। यह भी देखने को मिला कि जहां से लारवा मिले, वहां से एक नहीं, बल्कि तीन से चार बार मिले हैं।
टीम की ओर से लोगों को समझाया जा रहा है कि वे रुका पानी इकट्ठा न होने दें। इसके बावजूद लारवा मिल रहे हैं। इस वजह से चालान काटने की तैयारी की जा रही है। सोमवार से चंडीगढ़ में चालान काटे जा सकते हैं। मंगलवार शाम तक चंडीगढ़ में डेंगू के 140 केस सामने आ चुके हैं।
इतना देना होगा जुर्माना
यदि कहीं पर पानी जमा होता है तो विभाग की ओर से पहले नोटिस दिया जाएगा। उसके बाद चालान काटा जाएगा। पहले चालान पर 500 रुपये जुर्माना होगा। यदि उसके बाद भी नहीं माने तो दोबारा चालान काटने पर एक हजार रुपये जुर्माना व छह महीने की सजा का प्रावधान रखा गया है।
आयुष डाक्टरों को ट्रेनिंग
स्वास्थ्य विभाग ने आयुष डाक्टरों को भी ट्रेनिंग देने का फैसला लिया है। यदि उनके पास कोई पेशेंट आता है तो वे भी डेंगू के लक्षणों की पहचान कर सकेंगे। चंडीगढ़ की डिस्पेंसरी में बैठे आयुष डाक्टरों के पास भी कई मरीज आते हैं। इसके अलावा बुधवार को आरडब्ल्यूए व काउंसलर की मीटिंग बुलाई गई है। उन्हें भी डेंगू के प्रति जागरूक किया जा रहा है। शास्त्री मार्केट एसोसिएशन के साथ मीटिंग हुई। इसमें एंटी मलेरिया आफिसर डा. गौरव अग्रवाल ने उन्हें जागरूक किया।