एक महिला आईएएस को आपत्तिजनक मैसेज भेज कर विवादों में घिरे कैबिनेट मंत्री की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अब पंजाब राज्य महिला आयोग ने यह मुद्दा सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के समक्ष उठाने का फैसला किया है। आयोग की चेयरपर्सन मनीषा गुलाटी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सीएम के विदेश से लौटते ही वह उनसे इस संबंध में मुलाकात करेंगी। हालांकि आयोग द्वारा इस मामले में खुद संज्ञान लेने के मामले में उन्होंने इंकार कर दिया।
गौरतलब है कि विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। गुलाटी ने कहा कि सीएम से मिल कर मंत्री पर लग रहे आरोपों की सत्यता की जांच की जाएगी। पीड़ित अधिकारी और मंत्री, दोनों का पक्ष भी सुना जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग को अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है, न तो पीड़िता ने आयोग को शिकायत दी है, न पुलिस को। सिर्फ सोशल मीडिया पर उन्होंने इस बारे में सुना है, यह भी नहीं पता कि किस तरह का मैसेज भेजा गया था, इसलिए आयोग संज्ञान नहीं ले सकता।
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को निर्देश घोषित
महिला आयोग की चेयरपर्सन मनीषा गुलाटी ने मीटू मुहिम को महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में अच्छा कदम बताते हुए कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में निर्देश जारी किए। उन्होंने बताया कि सभी कर्मचारियों, प्रशासकों और चुने हुए सदस्यों पर ये लागू होंगे। कोई भी पुरुष मंत्री या अधिकारी मीटिंग के लिए किसी महिला कर्मचारी को अकेले दप्तर में नहीं बुला सकेगा।
अन्य महिला कर्मचारी की मौजूदगी में ही मीटिंग होगी। शोषण सिर्फ सीनियर द्वारा करियर, वेतन, नौकरी के बदले में किसी पर प्रभाव डालना ही नहीं, दो सहयोगी वर्करों के बीच आपत्तिजनक बर्ताव को भी इस श्रेणी में रखा गया है। गुलाटी ने कहा कि महिला को छूना, कपड़ों या शरीर संबंधी की भद्दी टिप्पणी, भद्दे लतीफे या व्यंग्य, मोबाइल फोन पर भद्दा लतीफा, तस्वीरें, जीआईएफ, विडियो या टेक्स्ट मैसेज भेजना भी शारीरिक शोषण के दायरे में आएगा।