संशोधन विधेयक का सियासी विरोध शुरू
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि इस संशोधन विधेयक से पंजाब की राजधानी पर ऐतिहासिक व भावनात्मक दावे को प्रभावी रूप से कमजोर किया जा सकेगा। केंद्र सरकार जान-बूझकर चंडीगढ़, नदियों के जल और पंजाब विश्वविद्यालय पर पंजाब के वैध अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि ये संशोधन बिल चंडीगढ़ को पंजाब से पूरी तरह छीनने का भाजपा का एजेंडा है। जिसके तहत केंद्र सरकार चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रही है। चंडीगढ़ के प्रशासक की शक्तियां जोकि अभी तक राज्यपाल के पास थीं, संशोधन के बाद यह शक्तियां चंडीगढ़ के लिए नियुक्त किए जाने वाले अलग प्रशासक के पास होंगी। पंजाब इस गैर-संवैधानिक दखल को कभी स्वीकार नहीं करेगा।
पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी स्थिति साफ करने की अपील की है। उन्होंने चेताते हुए कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का है और इसे छीनने की किसी भी कोशिश के गंभीर नतीजे होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी अपील की है कि वे तुरंत इस मसले पर केंद्र से बात करें।
उधर, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि संशोधन बिल पारित हुआ तो यह उन पंजाबियों के साथ धोखा और भेदभाव होगा, जिन्होंने देश के लिए सबसे अधिक बलिदान दिया है। यह चंडीगढ़ को पंजाब के प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण से स्थायी रूप से बाहर करने की कोशिश है। यह संघवाद की भावना के भी खिलाफ है।