हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी और केंद्र सरकार में सचिव केके जालान को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। उनकी संपत्ति के ब्यौरे में गड़बड़ी बेनामी आय व आरोपों की जांच सीबीआई और ईडी से करवाने की अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट प्रदीप रापड़िया के माध्यम से कैथल निवासी रघबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा कैडर के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और 2011-13 के बीच टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे केके जालान की संपत्ति की जांच होनी चाहिए।
याची ने कुछ दस्तावेजों को सौंपते हुए कहा कि जालान की संपत्ति उनके रैंक के अनुसार बहुत अधिक है। उन्होंने अपने और अपने परिवार के नाम से करोड़ों की संपत्ति जोड़ी है, लेकिन इस आय के साधन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस प्रकार के अहम पद पर रहने के चलते यह संपत्ति अवैध माध्यम से हो सकती है।
हरियाणा में सीएलयू अनियमितताओं से तार जुड़े होने के लगाए थे आरोप
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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याचिका में बताया गया कि जालान की पत्नी के नाम 3.5 करोड़, जालान के नाम 7 करोड़, उनकी मां व उनके नाम संयुक्त नाम से 4 करोड़ की संपत्ति है। इसके साथ ही करीब 20 करोड़ की प्रॉपर्टी ऐसी है, जो बेनामी है। ऐसे में इस मामले की सीबीआई और ईडी से जांच करवाई जाए। सीबीआई व ईडी को निर्देश जारी किए जाएं कि आरोपी के पास इतनी संपत्ति कैसे है। उसकी आय के कौन-कौन से माध्यम हैं।
याची ने कहा कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हरियाणा कैडर का है और इससे पूर्व हरियाणा में भी कार्य कर चुका है। वर्तमान में वह केंद्र सरकार में सचिव के तौर पर कार्यरत है। इसके साथ ही याची ने हरियाणा में सीएलयू मामले में हो रही सीबीआई जांच का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले में भी आरोपी की भूमिका हो सकती है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में याची पक्ष को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब इस याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के यह आदेश जालान के लिए बड़ी राहत लेकर आएं हैं। काबिलेगौर है कि इस मामले में याचिकाकर्ता वही है, जिसने हरियाणा में 10 हजार करोड़ के वैट स्कैम को उजागर किया था।