केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है। अब प्रदूषण करने वाले उद्योगों पर मोटा जुर्माना लगेगा। यहां तक कि जिस उद्योग ने अपने सामने पड़े खुले ग्राउंड में पानी का छिड़काव नहीं किया उस पर भी मोटा जुर्माना लगेगा। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली एनसीआर के लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया है।
प्रदूषण का अलग-अलग ग्रेड निर्धारित कर उसी के हिसाब से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि तय कर दी है। सीपीसीबी के मानकों का उल्लंघन करने पर उद्योगों को अधिकतम एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि बोर्ड कार्यालय में जमा करानी होगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदूषण घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।
एनसीआर में पड़ते पानीपत, सोनीपत, बहादुरगढ़, गुरुग्राम और फरीदाबाद में तमाम प्रयासों के बावजूद पीएम 2.5, पीएम 10 और एयर क्वालिटी इंडेक्स में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है। सीपीसीबी ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के लिए ग्रेडिंग रिस्पांस सिस्टम एक्शन प्लान (जीआरएसएपी) तैयार किया है।
स्टेट पॉल्यूशन बोर्ड के अधिकारी इन जिलों में संचालित उद्योगों पर नजर रख प्रदूषण गतिविधियों का साक्ष्य जुटाएंगे। एक्शन प्लान के अनुरूप पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमा कराने का नोटिस भेजेंगे। यह राशि अधिकतम एक करोड़ और न्यूनतम 10 लाख रुपये है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें लगातार मॉनीटरिंग भी कर रही हैं।