वीके सिंह ने कहा कि सीएए पर जब विपक्षी दलों की पोल खुलने लगी तो उन्होंने एनपीआर पर भी भ्रम फैलाना शुरू कर दिया। एनपीआर पर उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया देश में पहले से चालू है।
जनगणना के अनुसार प्रत्येक 10 साल बाद देश के नागरिकों की संपूर्ण जानकारी लेना मात्र ही एनपीआर का काम है। लगभग 10 साल पहले पूर्व मंत्री पी चिदंबरम ने एनपीआर के तहत देश की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पहचान पत्र दिया था, तब इस बात को लेकर किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
एनपीआर को लेकर कार्य करने वाली कांग्रेस अब मौकापरस्त राजनीति के तहत इसका विरोध करने में लगी है। कांग्रेस पार्टी विश्व पटल पर भारत की छवि को खराब करने के नित नए प्रयास कर रही है। इसी प्रकार से एनआरसी सिर्फ असम में लागू हुआ है, वो भी उच्चतम न्यायालय के आदेश से लागू किया गया है, बाकी जगह तो इसे लागू करने के लिए अब तक कोई मानक ही तय नहीं हुए हैं।
इस मौके पर डॉ. हर्षमोहन भारद्वाज, जीजेयू के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, गृह मंत्रालय से निदेशक चित्रलेखा, एचएसएससी सदस्य भोपाल सिंह, पूर्व सदस्य देवेंद्र यादव, डॉ. कुलदीप शर्मा, महेंद्र सेतिया, डॉ. कृष्ण चंद शर्मा, नरसिंह सेलवाल, वीरेंद्र गुप्ता, अश्विनी बजाज, मुकेश शर्मा, सुरेश शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।