चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) पर ग्रहण लग गया है। इसके साथ ही करीब नौ हजार लोगों का अपने आशियाने का सपना टूट गया। चंडीगढ़ प्रशासन ने बीते साल केंद्र को पत्र भेजकर पीएमएवाई प्रोजेक्ट के लिए 3.1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के रेट पर जमीन की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने प्रशासन की मांग को ठुकराते हुए जमीन को मार्केट रेट से कम पर देने से इनकार कर दिया है।
इसके चलते केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटक गई है।
बताते चलें कि शहर में जमीन का मार्केट रेट 30 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है। ऐसे में अब प्रशासन ने जमीन लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रशासन के निर्देश पर सीएचबी ने दो वर्ष पूर्व 20 मार्च को गरीबों को घर देने के लिए पीएमएवाई प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके लिए ईडब्ल्यूएस, एलआईजी और एमआईजी प्लैट्स का डिमांड सर्वे किया था। योजना के तहत इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे गए थे। बोर्ड ने 444 लोगों के नाम की फाइनल लिस्ट भी जारी कर दी थी। जो लोग बाद में किसी कारण प्रपत्र पूरे नहीं कर पाए थे, उन्हें एक और मौका दिया था।
यही वजह है कि छंटनी के बाद कुल नौ हजार योग्य लोग पाए गए थे। पीएमएवाई योजना के तहत इन्हीं चयनित लोगों को आवास मिलना था लेकिन अब केंद्र के इनकार के बाद योजना अधर में लटक गई है।
योजना में 1.27 लाख लोगों ने किया था आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए 1.27 लाख लोगों ने आवेदन किया था। सीएचबी आशा कर रहा है कि अधिग्रहण दर पर ही उन्हें इसके लिए जमीन मिल जाए, जो 3.1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है। प्रशासन ने केंद्र को 2018 में पत्र लिखा था, जिसके बाद केंद्र ने साफ कर दिया है कि मार्केट रेट 30 करोड़ प्रति एकड़ से कम रेट पर जमीन नहीं मिल सकती।
इतने महंगे आवास नहीं बनवा सकता सीएचबी
प्रशासन मार्केट रेट पर केंद्र से जमीन नहीं ले पाएगा क्योंकि अगर मार्केट रेट पर प्रशासन को इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अलॉट होती है, तो फ्लैट्स रेट्स काफी अधिक बढ़ जाएंगे। ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स की कीमत 25 लाख तक पहुंच जाएगी। अधिग्रहण दर पर जमीन मिलने पर इस फ्लैट की कीमत करीब 10 लाख ही होगी। ऐसे में इतने महंगे मकान बनवाना प्रशासन के लिए संभव नहीं है। यही वजह है कि प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट से हाथ खड़े कर दिए हैं।