परिवार के साथ छात्रा ओशिल बंसल।
अकाउंट, मैथ, बिजनेस और अर्थशास्त्र में शत-प्रतिशत यानी 100 में से 100 अंक मिले हैं। बिजनेस स्टडी का पेपर नहीं हुआ था। सीबीएससी ने औसत मानकर इस विषय में भी उन्हें 100 अंक दिए हैं। ओशिल कहती हैं कि मेरिट होती तो शायद उनका भी नाम देश के टॉपर्स में होता। बताया कि वह रोज चार से पांच घंटे पढ़ाई करती थीं। जो अंक आए हैं, उनसे वह संतुष्ट हैं।
अंग्रेजी में 97 अंक आए हैं। कहती हैं कि मां रितु बंसल ने हमेशा उनका साथ दिया है। माता-पिता व शिक्षकों की बदौलत ही आज यह सफलता मिली है। स्कूल की गतिविधियों में अधिक से अधिक हिस्सा लेती थीं। कोचिंग का भी सहारा लिया। कहा कि कोरोना में युवा घर बैठकर ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं। समय खराब न करें। यूट्यूब पर तमाम वीडियो अपलोड हैं। जिस चीज की जानकारी चाहें वहां से ले लें।
नॉन मेडिकल टॉपर अनिरुद्ध बोले- कोरोना संकट को अवसर में बदलें
पंजाब में असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग्स के पद पर तैनात संजीव कुमार गर्ग के बेटे अनिरुद्ध गर्ग ने नॉन मेडिकल में 98.8 फीसदी अंक हासिल कर टॉप किया है। वह इंजीनियर बनना चाहते हैं। अनिरुद्ध ने भौतिक विज्ञान, गणित, अंग्रेजी में 99 अंक पाए हैं। फिजिकल एजुकेशन में 100 अंक हासिल किए हैं।
चंडीगढ़ सेक्टर-49 की एडवोकेट सोसाइटी में रहने वाले अनिरुद्ध की मां प्रियंका गर्ग हेल्थ विभाग में साइंटिफिक ऑफिसर हैं। उन्होंने परीक्षा के दौरान बेटे की काफी मदद की। परीक्षा के समय वह पांच से छह घंटे पढ़ाई करते थे। अनिरुद्ध ने कहा कि भले ही मेरिट इस बार न आई हो लेकिन सीबीएसई ने अपनी ओर से अच्छे प्रयास किए हैं।
परिवार के साथ छात्र अनिरुद्ध गर्ग।
वह अपने अंक से संतुष्ट हैं। जितनी मेहनत की थी, वह सामने है। परिवार के अलावा दोस्तों का काफी सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि वह आईआईटी जाना चाहते हैं। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया है कि कोरोना के इस विपरीत दौर को अवसर में बदलना है। घर पर पढ़ाई करें। अपने को सुरक्षित रखें। जो लक्ष्य तय कर रखा है उसे पूरा करें। कुछ लोग इसी समय का फायदा उठाकर आगे बढ़ेंगे तो कुछ पीछे रह जाएंगे।
मेडिकल स्ट्रीम की टॉपर श्रुति बोलीं- हर हफ्ते का टारगेट रख की पढ़ाई
मेडिकल स्ट्रीम में ट्राइसिटी टॉपर श्रुति गोयल ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि उनके अंक 90 फीसदी से ज्यादा आएंगे, मगर 98.6 प्रतिशत की उम्मीद नहीं की थी। पूरे साल छह से सात घंटे पढ़ाई की। हर हफ्ते का टारगेट फिक्स किया, जिससे काफी लाभ हुआ और अच्छे अंक हासिल किए। पंचकूला के सेक्टर-12ए में रहने वाली श्रुति गोयल के पिता एक प्राइवेट कंपनी में हैं, जबकि मां पंजाब यूनिवर्सिटी में नौकरी करती हैं।
उनकी छोटी बहन 9वीं कक्षा में पढ़ती हैं। श्रुति ने बताया कि यूट्यूब पर टॉपर्स की वीडियो को देखा, इससे उन्हें प्लानिंग करने में मदद मिली। परीक्षाओं के दिनों में माता-पिता ने काफी प्रेरित किया। इससे पढ़ाई में कभी भी मुश्किल नहीं आई। श्रुति ने बताया कि मेडिकल स्ट्रीम की सभी परीक्षाएं लॉकडाउन से करीब 10 दिन पहले ही खत्म हो चुकी थी, इसलिए वह परीक्षाओं को लेकर ज्यादा समस्या नहीं आई। हालांकि परीक्षाओं के दौरान कोरोना की खबरें आने लगी थीं लेकिन उन्होंने उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और पढ़ाई करती रहीं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को टेंशन नहीं लेना चाहिए। अगर वह पॉजिटिव रहेंगे और रोजाना पढ़ाई करेंगे तो अच्छे नंबर आने तय है।
टॉपर श्रुति गोयल परिवार के साथ।
करिशा सेठी का कहना है कि वह रोजाना सात घंटे पढ़ाई करती थीं। पढ़ाई के दौरान आने वाले स्ट्रेस को दूर करने के लिए टेनिस खेलतीं थीं। भविष्य में वह कारपोरेट लॉयर बनना चाहती हैं। करिशा ने बताया कि पढ़ाई के दौरान टीचर्स ने उनकी काफी मदद की। करिशा के पिता संजय सेठी ब्रिटिश स्कूल के डायरेक्टर हैं जबकि मां गीतिका सेठी प्रिंसिपल हैं।
उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान उनके माता-पिता ने खूब हौंसला बढ़ाया। उन्हें स्कूल में अच्छी परफार्मेंस के लिए बेस्ट स्कूल ऑफ द इयर अवार्ड से भी नवाजा गया है। वह क्लैट की तैयारी लॉकडाउन के दौरान कर रही हैं। इसकी परीक्षा को लेकर वह काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के तनाव को कम करने के लिए वह मेडिटेशन और योग का भी सहारा लेती थीं। उन्होंने बताया कि जब भी कोई काम पूरी मेहनत और लगन से किया जाता है तो लोग उसमें सफलता हासिल कर लेते हैं। भवन विद्यालय सेक्टर-15 की प्रिंसिपल गुलशन कौर ने स्टूडेंट्स की सफलता पर खुशी जताई है।
आईएएस बनना चाहती हैं आराधना
सेंट सोल्जर स्कूल सेक्टर-16 पंचकूला की आराधना ने अपनी सफलता का श्रेय अपने टीचर्स और अभिभावकों दिया है। वह भविष्य में आईएएस या वकील बनना चाहती हैं। आराधना के पिता गगनदेव प्रसाद सेना में सूबेदार मेजर और माता रेखा देवी गृहिणी हैं। रामगढ़ रेंज में रहने वाली आराधना बताती हैं कि वह शुरू में 3 से 4 घंटे पढ़ती थीं लेकिन परीक्षाओं के दौरान 6 से 7 घंटे पढ़ने लगी। इसका परिणाम मिल गया है। आराधना को किताबें पढ़ना पसंद है। बैडमिंटन में भी रुचि है। आराधना के माता-पिता भी बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी ने उनका नाम रोशन किया है।