आठ साल के मासूम की बर्बर हत्या के मामले की जांच में हरियाणा पुलिस की नाकामी के चलते पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब जांच एजेंसी विफल हो जाए तो जनता के मन में न्याय का विश्वास कायम रखने के लिए जांच पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपी जा सकती है।
याचिका दाखिल करते हुए पलवल निवासी मुश्ताक ने हाईकोर्ट को बताया था कि उसका आठ साल का बेटा रिजवान 23 दिसंबर 2021 को मस्जिद गया था। इसके बाद उसका अपहरण कर लिया गया। 24 दिसंबर को इस बारे में एफआईआर दर्ज की गई थी और 30 दिसंबर को याची के बेटे का शव क्षत-विक्षत हालत में पाया गया था। याची के बेटे की निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच आरंभ की लेकिन इसे किसी नतीजे तक नहीं लेकर आई। ऐसे में याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हाईकोर्ट ने इस मामले में जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इसके बाद जांच के लिए एसआईटी गठित की गई लेकिन एसआईटी के हाथ भी खाली रहे।
हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस और एसआईटी की जांच को देखते हुए पाया कि याची के बेटे के गायब होने के मामले में सीसीटीवी फुटेज तक नहीं संभाली गई। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि जब जांच एजेंसी नाकाम हो जाए तो लोगों का न्याय में विश्वास कायम रखने के लिए जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है। राज्य की जांच एजेंसी, एसआईटी गठित करने के बावजूद भी अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है और मामले को सुलझाने में असमर्थ हों तो न्याय हित व सच्चाई तक पहुंचने के लिए जांच का जिम्मा सीबीआई जैसी विशेषज्ञ एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए ताकि अपराधी पकड़ा जा सके। हाईकोर्ट ने पलवल के एसपी को निर्देश दिया कि वह मामले का पूरा रिकॉर्ड दो सप्ताह के भीतर सीबीआई को सौंपें और सीबीआई को आवश्यक सहायता प्रदान करें।