जज नोटकांड मामले में सीबीआई विशेष अदालत में सीबीआई ने बुधवार को बचाव पक्ष की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि हिसार के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एवं सेशन जज आरके जैन का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही क्रॉस एग्जामिनेशन किया जाए। अदालत में दाखिल जवाब में सीबीआई ने कहा कि एडीजे आरके जैन का एग्जामिनेशन चीफ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए हुआ था।
बचाव पक्ष ने मामले में पिछली तारीख पर बतौर अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान दर्ज कराने वाले एडीजे आरके जैन की एसीआर की भी मांग की थी। सीबीआई ने बचाव पक्ष की इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि मामले में अभी अभियोजन पक्ष की गवाही चल रही है, ऐसे में एडीजे आरके जैन को समन नहीं किया जा सकता है।
इस तरह की प्रक्रिया बचाव पक्ष की गवाही के दौरान की जा सकती है। अदालत ने मामले में आगामी सुनवाई के लिए 31 मार्च की तारीख तय की है। सीबीआई ने जवाब में यह भी कहा कि एक ज्यूडिशियल ऑफिसर की एसीआर का केस से कोई लेना देना नहीं है, इसलिए इस तरह के रिकार्ड को हासिल करने के लिए समन किए जाने की कोई जरूरत नहीं है।
इससे पूर्व बचाव पक्ष ने आरके जैन के क्रास एग्जामिनेशन के लिए उनकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की बजाय पेश किए जाने की अनुमति संबंधी अर्जी दायर की थी। बचाव पक्ष ने यह अर्जी तब दायर की थी जब पिछली तिथि में एडीजे आरके जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान दिया था कि वह मामले में सह आरोपी रविंदर सिंह से जस्टिस निर्मल यादव के यहां समारोह के दौरान दो-तीन बार मिले थे। उन्होंने बयान दिया था कि उन्होंने कभी अकेले में मुलाकात नहीं थी, बल्कि उनके साथ ज्यूडिशियल ऑफिसर होते थे।